न्यू नरायच ट्रांसपोर्ट नाम का व्हाट्सएप ग्रुप मिला
इन संदेशों के आधार पर ओवरलोड ट्रक ग्रामीण मार्गों या खेतों के रास्ते में छुपा दिए जाते थे जिससे कार्रवाई के दौरान टीम को बार–बार खाली स्थान मिलता था। लगातार कई दिनों तक ऐसे ही घटनाक्रम के बाद प्रशासन को शक हुआ कि सरकारी टीम की लोकेशन किसी को पहले से मिल रही है। जिलाधिकारी और एसपी द्वारा तकनीकी जांच के आदेश दिए जाने पर जब अवैध परिवहन में शामिल चालकों के मोबाइल फोन खंगाले गए तो न्यू नरायच ट्रांसपोर्ट नाम का व्हाट्सएप ग्रुप मिला, जिसमें 200 से अधिक लोग जुड़े थे।
अचानक रास्ते से गायब हो जाती थीं गाड़ियां
इसी ग्रुप से लोकेशन भेजी जा रही थी। कई ऑडियो और स्क्रीनशॉट में सरकारी टीम की सही लोकेशन दिशा और समय दर्ज मिला है। विभाग ने इस नेटवर्क को सरकारी कार्य में बाधा और राजस्व हानि का बड़ा कारण माना।ऐसे ग्रुपों पर अमर सिंह उजाला ने 14 तारीख को प्रकाशित खबर में ही बड़ा खुलासा कर चुका था।इसके चार दिन बाद ही प्रसासन ने चालकों के मोबाइल के जरिये व्हाट्सएप ग्रुप खंगाले और फिर लोकेटरों को चिन्हित कर कार्रवाई शुरू की। सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी अमिताभ राय ने बताया कि हाल के दिनों में कार्रवाई के दौरान कई बार ऐसा हुआ कि गाड़ियां अचानक रास्ते से गायब हो जाती थीं।
नेटवर्क को पूरी तरह खत्म किया जाएगा
पुलिस ने दो लोगों को पकड़ा है, जिनसे पूछताछ चल रही है। उन्होंने बताया कि चालकों के मोबाइल में मिले व्हाट्सएप ग्रुप के आधार पर लोकेटरों तक पहुंचे और नियमित लोकेशन भेजने वालों की पुष्टि खनन विभाग से भी हुई, जिसके बाद मुकदमा दर्ज कराया गया। खनन निरीक्षक उमाकांत द्वारा 23 लोगों को नामजद किया गया है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में मामला दर्ज हुआ है। जिलाधिकारी घनश्याम मीणा ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसे नेटवर्क को पूरी तरह खत्म किया जाए और ओवरलोडिंग के खिलाफ विशेष अभियान लगातार चलाया जाए। पुलिस अधीक्षक दीक्षा शर्मा ने साइबर जांच मोबाइल डाटा एनॉलिसिस और व्हाट्सएप ग्रुप की तकनीकी जांच के आदेश दिए हैं।