हैलट में अतिक्रमणकारियों ने बुधवार को गिराई गई दीवार फिर खड़ी की।
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कानपुर। शहर का ‘जवाहर बाग’ बन रहे हैलट कैंपस में अपराधी शरण पाते हैं। बड़ी वारदातों को अंजाम देने के बाद ज्यादातर अपराधी यहीं छुपते हैं। सरकार की बिजली और पानी का मुफ्त में इस्तेमाल करते ही हैं, कैंपस की खाली जमीनों को किराए पर भी बेचते हैं। इसका खुलासा खुफिया विभाग की रिपोर्ट में किया गया है। अतिक्रमण हटाने गई टीम पर पथराव के बाद खुफिया विभाग ने कैंपस की जानकारी इकट्ठा करनी शुरू कर दी है।
हैलट अस्पताल के पीछे एक तरफ कर्मचारियों और दूसरी तरफ जूनियर डॉक्टरों के रहने के लिए आवास बनाए गए थे। बच्चों के खेलने के लिए बीच में बड़ा मैदान छोड़ा गया था। 80 के दशक में हैलट में बाहरियों ने कब्जा करना शुरू किया। पहले कर्मचारियों की मिलीभगत से कब्जा शुरू हुआ। बाद में बाहरी हावी होते गए और रिटायर हुए कर्मचारियों के आवासों पर इनका कब्जा होता गया।
पांच लाख कम हुआ बिल
वर्ष 2009 में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्रिंसिपल प्रो. आनंद स्वरूप ने प्रशासन के सहयोग से हैलट और मेडिकल कॉलेज कैंपस के कब्जों को हटवाने की मुहिम शुरू की थी। अधिकांश कब्जे हटा भी दिए गए थे। उसके अगले महीने बिजली का बिल पांच लाख रुपये कम आया था। वर्तमान में हैलट का बिजली का बिल हर महीने तकरीबन 40 लाख रुपये आता है।
एयरकंडीशंड झोपड़ियां
हैलट कैंपस में कब्जा करने वालों ने झोपड़ियों में भी एयरकंडीशंड लगवा रखे हैं। 24 घंटे बिजली सप्लाई का फायदा यही लोग उठाते हैं। वाॅटर लाइन को जगह-जगह काट डाला है। कैंपस के पिछले हिस्से में जीटी रोड से सटे एक भाग में तो वाशिंग सेंटर भी खोल लिया है।