केशवपुरम के इंपायर क्लीनिक में अवैध तरीके से हेयर ट्रांसप्लांट किए गए। स्वास्थ्य विभाग ने अमानक होने पर क्लीनिक के पंजीयन के नवीनीकरण का आवेदन निरस्त कर दिया था। नोटिस भी जारी हुई थी, इसके बावजूद ट्रांसप्लांट किए गए। इसी के चलते इंजीनियर विनीत दुबे और मयंक कटियार अपनी जान गवां बैठे। क्लीनिक का पंजीकरण डॉ. अनुष्का तिवारी के पति डॉ. सौरभ तिवारी नाम पर है। वह बीडीएस हैं, बीडीएस डिग्रीधारी डॉक्टर हेयर ट्रांसप्लांट नहीं कर सकते हैं। पंजीकरण अभिलेख में भी डॉ. अनुष्का तिवारी का नाम नहीं है। पुलिस रोहतक विश्वविद्यालय से डॉ. अनुष्का की डिग्री की जांच करा रही है।
इंपायर क्लीनिक का पंजीयन पहली बार 2020-21 में हुआ। नवीनीकरण 2023-24 में किया गया। पंजीयन डॉ. सौरभ तिवारी के नाम पर था। इसमें कोई पैनल या दूसरे डॉक्टर का नाम नहीं था। डॉ. सौरभ ने 2024-25 में पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया, लेकिन मानक पूरे न होने पर इसे निरस्त कर दिया गया। एसीएमओ (नर्सिंगहोम) डॉ. रमित रस्तोगी ने बताया कि बीडीएस डॉक्टर ट्रांसप्लांट नहीं कर सकता है। लाइसेंस पर डॉ. अनुष्का का नाम नहीं है। क्लीनिक का अनाधिकारिक इस्तेमाल किया गया। जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा।
हेयर ट्रांसप्लांट (फाइल फोटो)
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हेयर ट्रांसप्लांट के नाम पर कोई क्लीनिक पंजीकृत नहीं
डॉ. रस्तोगी ने बताया कि जिस स्पेशियलिटी के नाम पर रजिस्ट्रेशन कराया जाता है, डॉक्टर उसी से संबंधित इलाज कर सकता है। हेयर ट्रांसप्लांट प्लास्टिक सर्जन, डर्मिटोलोडिस्ट, एमडीएस डिग्री वाले मैक्सिलो फेशियल सर्जन कर सकते हैं, लेकिन हेयर ट्रांसप्लांट सेंटर के नाम पर विभाग में कोई क्लीनिक पंजीकृत नहीं है।
डॉ. अनुष्का तिवारी
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तीन सदस्यीय कमेटी कर रही मामले की जांच
इंजीनियरों की मौत के मामले की जांच तीन सदस्यीय कमेटी कर रही है, जिसका गठन एसीएमओ (मेडिकल बोर्ड) डॉ. आरके गुप्ता की अगुवाई में हुआ है। उर्सला के सीनियर फिजीशियन डॉ. शैलेंद्र तिवारी और डर्मिटोलॉजिस्ट डॉ. रत्नेश प्रभाकर भी शामिल हैं। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर अगली कार्रवाई की जाएगी।