कानपुर में अब दान में आने वाले आम व्यक्ति के खून में भी कोरोना एंटीबॉडीज की जांच की जाएगी। इससे पता लगेगा कि कोरोना के हल्के संक्रमण के बाद लोगों के शरीर में एंटीबॉडीज विकसित हो गई है कि नहीं। इसके लिए हैलट के ब्लड ट्रांसफ्युजन विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजकर किट मांगी हैं।
एक किट से 96 व्यक्ति की एंटीबॉडीज की जांच हो सकती है। किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में एंटीबॉडीज की जांच जा चुकी है। ऐसे लोगों के शरीर में भी कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज मिली हैं जो कोरोना निगेटिव रहे हैं। प्लाज्मा थेरेपी से हैलट के न्यूरो साइंसेज स्थित कोविड अस्पताल में एक रोगी की जान बच गई है। उसे निमोनिया हुआ था और सांस नहीं ले पा रहा था। प्लाज्मा चढ़ने के बाद वह ठीक हुआ।
हालांकि कोरोना से ठीक हो चुके लोग (एंटीबॉडीज विकसित हो चुकी होती है) प्लाज्मा दान करने में दोबारा संक्रमण की आशंका से घबरा रहे हैं। ऐसे में अगर आम डोनर के खून में एंटीबॉडीज मिल जाती हैं तो रोगियों को फायदा होगा। हैलट के ब्लड ट्रांसफ्युजन विभाग की प्रभारी डॉ. लुबना खान ने बताया कि किट के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।