नौ ग्रहों में गुरु सबसे शुभ ग्रह माने जाते हैं। गुरु 12 माह में राशि बदलते हैं। ये एक मई को दोपहर 12:59 बजे शुक्र की वृषभ राशि में गोचर करने जा रहे हैं। ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि वृषभ राशि में प्रवेश के बाद गुरु छह मई को रात 11:02 बजे अस्त हो रहे हैं और तीन जून को प्रातः काल 7:01 बजे उदय होंगे। इनके अस्त होने से मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं, और उदय होने से शुभ कार्य प्रारंभ हो जाते हैं। वर्तमान में शुक्र ग्रह अस्त चल रहे हैं, इसलिए मांगलिक कार्यों पर पहले से विराम लगा हुआ है।
इस बार मांगलिक कार्य 28 जून तक बंद रहेंगे। 29 जून को शुक्र उदय के साथ मांगलिक कार्य शुरू होंगे। देवगुरु बृहस्पति वृषभ राशि में 1 मई 2024 से 14 मई 2025 तक रहेंगे, उसके बाद बुध की मिथुन राशि में प्रवेश कर जाएंगे। देवगुरु बृहस्पति का यह गोचर राशि अनुसार फल देता है। गुरु की शुभता के लिए मस्तक पर हल्दी और केसर का टीका लगाएं। गुरुवार पीले वस्त्र, फल, चना, गुड़ चने की दाल आदि का दान करें। गाय का पूजन कर उसे आटा की लोई खिलाएं, पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं।