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गुरु गोबिंद सिंह महाराज का प्रकाशोत्सव आज से

Thu, 14 Jan 2016 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
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गुरु गोबिंद सिंह महाराज का तीन दिवसीय पावन प्रकाशोत्सव गुरुवार से मोतीझील में शुरू हो रहा है। 16 जनवरी तक चलने वाले इस कार्यक्रम का आयोजन श्री गुरु सिंह सभा ने किया है।
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इस बार प्रकाशोत्सव का मुख्य आकर्षण 16 सालों बाद की जा रही आतिशबाजी होगी। सभा के अध्यक्ष हरविंदर सिंह लार्ड ने बताया कि प्रकाशोत्सव का नगर कीर्तन गुरुवार को दोपहर 12:30 गुरुद्वारा लाटूश रोड से गुरु ग्रंथ साहिब व उनके पंज प्यारे साहिब की अगुवाई में उठेगा। नगर कीर्तन के पूरे रास्ते को सजा कर रोशनी की गई है।

कार्यक्रम के समापन पर दीवान समाप्ति के बाद गुरु का लंगर होगा। उन्होंने बताया कि नगर कीर्तन का रात में मोतीझील में विराम होगा। इसके बाद जत्थेदार रहिरास साहिब का पाठ और कीर्तन करेंगे। अगले दिन 15 जनवरी को सुबह 7 बजे से लेकर रात 11 बजे तक कीर्तन, सेवा और गुरमत विचार के कार्यक्रम होंगे।
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16 जनवरी को तड़के 3:30 बजे से सुखमनी साहिब का पाठ होगा। इसके बाद दोपहर 2 बजे तक कीर्तन चलेगा। इस दौरान तीनों दिन रागी जत्थे श्री दरबार साहिब अमृतसर से इंदरजीत सिंह खालसा, सरबजीत सिंह लाडी, आतमजीत सिंह, जालंधर से प्रदीप सिंह और कुलदीप सिंह कीर्तन व गुरमत कथा कहेंगे।

घाटों पर स्नान की तैयारी, लगेगा मेला
कानपुर। मकर संक्रांति पर गंगा घाटों पर स्नान का महत्व है और इसके लिए तमाम लोग अभी से पहुंचने लगे हैं। पौष मास में जब सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है, तभी यह पर्व मनाया जाता है।

इस बार 15 जनवरी को यह पर्व मनाया जाएगा। हालांकि परंपरागत मान्यता के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाती रही है। ऐसे में गुरुवार और शुक्रवार को लोग यह पर्व मनाएंगे। मकर संक्रांति पर गंगा बैराज में स्नान नहीं होगा। घाट पर पुलिस मौजूद रहेगी।

सरसैया घाट, भगवतदास घाट, परमट, गोला घाट और मैस्कर घाट पर लोगों को नाव से पार उतारने की व्यवस्था की गई है। घाटों पर पंडे और मल्लाह भी रहेंगे। पार उतारने के लिए प्रति व्यक्ति 10 से 15 रुपये और पूरी नाव 100 से 150 रुपये में उपलब्ध रहेगी। वहीं, घाटों के आसपास रेती और गंगा में फूल-गंदगी जमा होने के कारण पिछले सालों की तरह इस बार भी स्नान गंगा के पार होगा।

उधर, सरसैया घाट और गुप्तार घाट पर बुधवार दोपहर से दूर-दराज गांवों से तमाम लोगों का आना शुरू हो गया था। उधर, घाटों पर पार्किंग की सुविधा नहीं है। श्रद्धालुओं को अपने वाहन की सुरक्षा स्वयं करनी होगी। 
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