एमबीबीएस की छात्रा अमृता (फाइल फोटो)
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कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की छात्रा अमृता सिंह (24) की खुदकुशी के मामले में पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करेगी। पुलिस जांच में मेडिकल कालेज प्रशासन पर लगाए गए आरोप के साक्ष्य नहीं मिले हैं। मामले की फाइल अब बंद कर दी गई है।
झांसी के केके पुरी कालोनी निवासी रामसनेही ग्रामीण अभियंत्रण सेवाएं विभाग में इंजीनियर हैं। वर्तमान में उनकी तैनाती इटावा में हैं। जालौन में भी रामसनेही का घर है। उनकी बेटी अमृता सिंह एमबीबीएस अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रही थी।
23 जनवरी को वह लापता हो गई थी। दूसरे दिन गंगाघाट थाना क्षेत्र में अमृता का शव गंगा में उतराता मिला था। रामसनेही ने कॉलेज की प्राचार्य डॉ. आरती लाल चंदानी के अलावा तीनों विभागाध्यक्षों डॉ. ऋचा गिरि, डॉ. यशवंत और डॉ. किरन पांडेय पर उत्पीड़न का आरोप लगाकर 30 जनवरी को स्वरूपनगर थाने में तहरीर दी थी।
स्वरूपनगर इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार पांडेय ने बताया कि जांच के दौरान अमृता की साथी छात्राओं और कॉलेज प्रशासन से पूछताछ की गई, जिसमें उत्पीड़न के साक्ष्य नहीं मिले। वादी की तरफ से भी संबंधित साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए जा सके। इसलिए आरोपों को खारिज कर दिया गया है। पुलिस अब कोई कार्रवाई नहीं करेगी।