जाजमऊ में एसजीएसटी के अधिकारी फर्म की जांच पड़ताल करते हुए
- फोटो : अमर उजाला
राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने दो फर्मों द्वारा बड़े पैमाने पर जीएसटी चोरी का खुलासा किया है। इन फर्मों ने 2.25 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हड़प ली। विभागीय अफसरों ने 86 लाख रुपये से अधिक की आईटीसी ब्लाक कराई है। इसके साथ ही व्यापारी से 47.31 लाख रुपये जमा कराए। जांच में ये भी पता चला कि पूर्व में रद्द तीन फर्मों से खरीद-बिक्री दिखाई गई। वहीं जिस फर्म की जांच करने गए उसमें एक में पति और दूसरी फर्म का संचालन पत्नी के नाम किया जा रहा था।
अपर आयुक्त कुमार आनंद और संयुक्त आयुक्त सुशील गौतम के निर्देश पर एसआईबी रेंज-डी के उपायुक्त संतोष कुमार सिंह, सहायक आयुक्त सुभाष चंद्र और राज्य कर अधिकारी रमेश तिवारी ने कार्रवाई की। जाजमऊ स्थित मेरिट एक्सिम फर्म के संचालक तैमूर आलम हैं। फर्म ने अपनी सभी कर देनदारी को आईटीसी से समायोजित किया था। इसमें एक भी रुपया नकद जमा नहीं किया गया। जांच में पाया गया कि वित्त वर्ष 2024-25 में 49.37 लाख रुपये और वित्त वर्ष 2025-26 में 75.68 लाख रुपये की फर्जी आईटीसी का दावा किया गया। कुल मिलाकर 1.25 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी आईटीसी का समायोजन किया गया। व्यापारी से मौके पर ही 47.31 लाख रुपये डीआरसी-03 के माध्यम से जमा कराए गए। इसी व्यापार स्थल पर पीस लेदर नामक एक अन्य फर्म भी पंजीकृत मिली। जिसकी संचालक आयशा जफर थी। वो तैमूर आलम की पत्नी हैं।
जीएसटी कॉमन पोर्टल पर फर्म की जांच की गई। इसमें वित्त वर्ष 2024-25, 2025-26 और 2026-27 में कुल 1 करोड़ 87 लाख रुपये की फर्जी आईटीसी लेने का मामला सामने आया। अफसरों ने बताया कि फर्म स्वामी तैमूर आलम द्वारा बताया गया कि जाजमऊ निवासी सद्दाम के जरिए कैंसिल तीन फर्म से बिल एवं माल की सप्लाई की गई है। इसके साथ ही जांच का दायरा भी बढ़ा दिया गया है। इन फर्मों के जरिए हुए लेन-देन की जांच कराई जा रही है। अभी 38.88 लाख रुपये की ली गई आईटीसी को ब्लॉक कर दिया गया है।