स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारियों के सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) खातों और लोन में वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। प्रयागराज से आई लेखा विभाग की दो सदस्यीय ऑडिट टीम ने तिंदवारी पीएचसी में तैनात आप्टोमेट्रिस्ट देवेंद्र कुमार के जीपीएफ खाते की जांच में करीब 35 लाख रुपये के लोन में गड़बड़ी पकड़ी है। आरोप है कि जीपीएफ खाते में उपलब्ध धनराशि से अधिक रकम दर्शाकर लोन लिया गया। साथ ही पूर्व में निकाली गई धनराशि की कटौती खाते में नहीं दर्शाई गई।
ऑडिट टीम ने बुधवार को स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारियों के जीपीएफ खातों और उनके लिए गए लोन से संबंधित अभिलेखों की जांच की। जांच के दौरान तिंदवारी पीएचसी में तैनात आप्टोमेट्रिस्ट के खाते में यह अनियमितता सामने आई। टीम जीपीएफ और लोन से जुड़े कई कर्मचारियों के दस्तावेज अपने साथ प्रयागराज ले गई है। वहां अभिलेखों का मिलान कर पूरी स्थिति स्पष्ट की जाएगी। चित्रकूटधाम मंडल के अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. अभय सिंह ने बताया कि ऑडिट टीम ने जांच की है। अब प्रयागराज में अभिलेखों का मिलान किया जाएगा। इसके बाद रिपोर्ट से अनियमितता की पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।
ज्यादा निकाली गई रकम की होगी रिकवरी
ऑडिट टीम ने आप्टोमेट्रिस्ट देवेंद्र कुमार के विरुद्ध कार्रवाई के लिए शासन को पत्राचार किया है। साथ ही सीएमओ को विभागीय कार्रवाई कराने और खाते से अधिक निकाली गई धनराशि की रिकवरी कराने के निर्देश दिए गए हैं। बांदा में अन्य कर्मचारियों के जीपीएफ खातों में भी अनियमितता मिली है या नहीं, इसकी स्थिति ऑडिट पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
महोबा में भी सामने आ चुका है मामला
स्वास्थ्य विभाग में जीपीएफ खाते में अनियमितता का इसी तरह का मामला महोबा में भी सामने आ चुका है। वहां स्वास्थ्य विभाग के एक लिपिक के खाते में गड़बड़ी पकड़ी गई थी। बांदा में सामने आए मामले के बाद अब अन्य कर्मचारियों के जीपीएफ खातों की जांच पर भी नजर है।