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दिव्यांग गौशाला का शुभारंभ करने पहुंचे राज्यपाल, बताये पुराणों में वर्णित तथ्य 

Mon, 27 Nov 2017 07:21 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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दीपप्रज्जवलित कर दिव्यांग गौशाला का शुभारंभ करते राज्यपाल व अन्य - फोटो : अमर उजाला
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प्राचीनकाल ने सनातन धर्म के लिए गाय पूज्यनीय रही है, लोगों को चाहिए गाय की सेवा माता-पिता की तरह ही करें। भारत एक कृषि प्रधान देश है जहां गाय और गंगा का अपना विशेष महत्व है। गौ सेवा के लिए स्थापित किए गए। यह बात उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रामनाईक ने कानपुर देहात चौबेपुर के पहले निशक्त गायों के लिए बने गौशाला के शुभारंभ के मौके पर कही।
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शुक्रवार को राज्यपाल गौरीलक्खा गांव हेलीकाप्टर से पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले कार्यक्रम स्थल पर पौधा रोपकर मौजूद लोगों को वातावरण की शुद्धता के लिए अधिक से अधिक पौधरोपण की शपथ दिलाई। क्षेत्रीय सांसद अंजूबाला, पूर्व सांसद श्याम बिहारी मिश्रा एवं मां गंगा प्रदूषण मुक्ति अभियान के राष्ट्रीय संयोजक रामजी त्रिपाठी द्वारा गाय की प्रतिमा भेंटकर उनका स्वागत किया। 
राज्यपाल ने कहा कि गाय के दूध से ही हम सभी का पोषण मिलता है इसलिए दूध बंद होने पर हम गाय माता को कैसे छोड़ सकते हैं। उन्होंने गाय की तुलना माता-पिता से की। राज्यपाल ने दिव्यांग गौशाला खोले जाने पर गौ सेवकों की सराहना कर उन्हें प्रमाण पत्र भी सौंपे। इस दौरान राज्यपाल ने उन्नत संस्कार नामक पत्रिका का विमोचन भी किया। इस मौके पर घायल और शारीरिक रूप से कमजोर करीब दर्जनभर गाय निशक्त गौशाला में लाईं गईं। पशु चिकित्सा केंद्र चौबेपुर द्वारा कैंप लगाए जाने के साथ ही पशुओं को दवाएं भी दी गईं। इस मौके पर क्षेत्रीय विधायक भगवती सागर, भाजपा जिलाध्यक्ष रामशरण कटियार, गौशाला आयोग उप्र अध्यक्ष राजीव गुप्ता, डा. कमल कावरी, श्यामजी त्रिपाठी, शिवम त्रिपाठी, पुरुषोत्तम बाजपेई, भार्गवी नारायण और आदित्य त्रिपाठी आदि लोग मौजूद रहे।
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लंबा स्वागत देख राज्यपाल से संभाला माइक
दिव्यांग गौशाला के शुभारंभ पर पहुंचे उ0प्र0 के राज्यपाल का पारा उस समय चढ़ गया जब कार्यक्रम संचालक द्वारा एक के बाद एक लोगों को स्वागत के लिए मंच पर बुलाया जाने लगा। स्वागत में तमाम समय बर्बाद होता देख आखिर राज्यपाल ने माइक अपने हाथ में ले लिया, राज्यपाल के यह कहे जाने पर कि मात्र एक घंटे का समय ही दे पाउंगा, सारा समय स्वागत में ही निकला जा रहा है। राज्यपाल की नाराजगी देख अन्य वक्ताओं ने अपनी बात यथाशीघ्र समाप्त कर संबोधन के लिए उन्हें अतिशीघ्र ही आमंत्रित किया।
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