मातृभाषा में ही माध्यमिक शिक्षा देनी चाहिए। जर्मनी, इंग्लैंड सहित कई देश अपनी मातृभाषा को ही तवज्जो देते हैं। लेकिन भारत में यह विडंबना है कि यहां पर हर नागरिक और सिस्टम अंग्रेजी पर जोर देते हैं। मातृभाषा को बढ़ावा देने से ही देश का और बच्चों का सर्वांगीण विकास होगा।
ये बातें जरौली स्थित हीरालाल पटेल इंटरनेशनल स्कूल के उद्घाटन पर राज्यपाल रामनाईक ने कहीं। उन्होंने विद्यालय में भारतीय भाषाओं की वैज्ञानिकता एवं सन्निकटता पर दो दिवसीय परिसंवाद का शुभारंभ किया। इससे पहले राज्यपाल शनिवार सुबह कानपुर गौशाला सोसाइटी भौंती पहुंचे और वहां सैकड़ों गाय की देखभाल, बैल चालित संयंत्र, विभिन्न गो-उत्पाद देखकर प्रभावित हुए।
राज्यपाल ने जाते-जाते कहा कि गो-उत्पाद के प्रति लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। लोग जानेंगे तभी इसका प्रसार होगा। राज्यपाल ने फीता काटकर हीरालाल इंटरनेशनल स्कूल का उद्घाटन किया। राज्यपाल रामनाईक ने कहा कि मेयर और महामहिम शब्द ठीक नहीं है।
राज्यपाल के पहले महामहिम लगाने को भी गलत ठहराया और उत्तर प्रदेश में भी हिंदी में सुधार की जरूरत बताई। परिसंवाद में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के सचिव अतुल कोठारी ने कहा कि रिसर्च में यह बात सामने आई है कि अंग्रेजी भाषा के इस्तेमाल से मस्तिष्क का एक ही हिस्सा सक्रिय होता है।
लेकिन हिंदी के इस्तेमाल से मस्तिष्क के दोनो हिस्सों का संपूर्ण विकास होता है। एक बार पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से पूछा गया कि आप वैज्ञानिक कैसे बने..? उनका उत्तर था कि मैंने 12वीं तक सभी विषयों की पढ़ाई हिंदी में की है।
प्रोफेसर मोहन लाल छीपा ने कहा कि हिंदी को बढ़ावा देने से ही समाज और देश की तरक्की संभव है। समापन पर विद्यालय के प्रधानाचार्य अरुण पटेल ने राज्यपाल को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। राज्यपाल ने मोहिनी अग्रवाल की आधुनिक अर्थशास्त्र पुस्तक का विमोचन भी किया।
महापौर जगतवीर सिंह द्रोण, डॉ कैलाश विश्वकर्मा, डॉ. जितेंद्र कुमार, डॉ. अनूप शर्मा, हीरालाल पटेल, सांसद देवेंद्र सिंह भोले, विधायक रघुनंदन सिंह भदौरिया मौजूद रहे।