सीआईडी ने तेजेंद्र और चंद्र को नार्को के लिए बुलाया तो दोनों ने जांच से ऐन पहले मना कर दिया।
कानपुर। आशुतोष अपहरण-हत्याकांड में जिस फोन से फिरौती मांगी गई थी, उसे शनिवार को पुलिस ने बरामद कर लिया। इस फोन के इंटरनेशनल मोबाइल स्टेशन इक्यूपमेंट आईडेंटिटी नंबर (आईएमइआई) से उसमें इस्तेमाल सिमकार्ड की काल डिटेल मिल जाएगी और उससे अपहरण और फिरौती मांगना साबित हो जाएगी। इससे आरोपियों का जुर्म साबित करते हुए कोर्ट में उन्हें सजा दिलवाने में आसानी होगी।
शनिवार सुबह पुलिस टीमों ने आरोपियों के खिलाफ सबूत इकट्ठा करने का काम शुरू कर दिया। आरोपी विशाल को लेकर पुलिस टीम कानपुर देहात के नबीपुर से गिरसी जाने वाली सड़क पर पहुंची। सड़क के दाहिनी तरफ खारजा नहर बहती है। विशाल ने 9 जून को फिरौती की आखिरी काल करके इसी सड़क पर 7- 8 किलोमीटर के दायरे में सिमकार्ड और फोन को तोड़ कर फेंका था। खोजबीन के दौरान पुलिस ने सड़क के बाईं तरफ मोबाइल का वह हिस्सा बरामद कर लिया जिसपर आईएमइआई नंबर लिखा था। कुछ दूरी पर मोबाइल का ढक्कन, अन्य पार्ट्स और बैटरी भी मिल गई। काफी तलाशने के बाद सिमकार्ड पुलिस नही ढूंढ़ पाई। मोबाइल के सभी हिस्सों को जोड़कर पुलिस ने सेट तैयार कर लिया। यह मोबाइल ‘लावा’ कंपनी का सस्ता सेट था। यह मोबाइल सिर्फ अपहरण के लिए ही खरीदा गया था। इस मोबाइल से सिर्फ पांच कालें की गई थीं।
कड़ी से कड़ी जुड़ी तो सजा पक्की
कानपुर (ब्यूरो)। आशुतोष अपहरण और मर्डर केस में भले ही आशुतोष की बॉडी रिकवर न हुई हो लेकिन पुलिस ने अगर घटना की कड़ी से कड़ी जोड़ ली तो अभियुक्तों को कोर्ट में राहत मिलना मुश्किल होगा। परिस्थितिजन्य साक्ष्य और खोपड़ी की हड्डी की डीएनए रिपोर्ट अहम रहेगी। शासकीय अधिवक्ता राजेश्वर तिवारी का कहना है कि अभी इस केस में बॉडी मिलने की संभावना है। जलाए गए स्थान से कुछ अवशेष लिए गए हैं। यह अहम साबित हो सकते हैं। खोपड़ी की हड्डी का डीएनए मैच हो गया तो बहुत बड़ा सबूत साबित होगा। अभी विवेचना बाकी है। पुलिस के पास कई सबूत आने की संभावना है। इसलिए अभियुक्तों को राहत मिलना मुश्किल होगा। सीनियर एडवोकेट विजय बक्शी का कहना है कि पहले कई मुकदमों में सभी गवाहों के मुकरने के बाद भी परिस्थितिजन्य सबूत की कड़ी जुड़ने पर कोर्ट ने सजा सुनाई है। इस केस में भी अगर पुलिस ने घटना की कड़ी से कड़ी जोड़ ली तो अभियुक्तों का बचना मुश्किल होगा। अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित का कहना है कि अभी पुलिस अभियुक्तों को रिमांड पर लेकर और सबूत जुटाएगी। पुलिस जितने ज्यादा सबूत जुटा लेगी उतनी ही अभियुक्तों की मजबूत घेरेबंदी होगी। बॉडी न मिलने पर भी डीएनए रिपोर्ट अहम रहेगी।