पापा जी आप कैसे हैं? आज आपको मैंने सपने में देखा तो सोचा फोन लगा लूं। मम्मी कैसी हैं? अपना और मम्मी का ख्याल रखिएगा।’ लखनऊ में हॉस्टल में फांसी लगाकर सुसाइड करने वाली बीएससी अंतिम वर्ष की छात्रा निधि गुप्ता ने खुदकुशी से कुछ देर पहले ही यहां अपने घर पर फोन करके ये बातें की थीं।
बड़े भाई प्रांशू से भी खुशमिजाजी के साथ बतियाया था। अब घर के लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं कि निधि ने आखिरकार यह नादानी क्यों कर ली? न सिर्फ परिवार बल्कि पड़ोसी भी निधि के सुसाइड से सदमे में हैं। देर रात लखनऊ से शव लाने के बाद परिजनों ने रविवार को सुबह यहां अंतिम संस्कार कर दिया।
शहर के लोहिया नगर (बिजलीखेड़ा) मोहल्ले में प्रकाशचंद्र गुप्ता रहते हैं। वह यहां स्वास्थ्य विभाग के टीकाकरण अनुभाग में हैं। उनकी पत्नी ऊषा बाल एवं पुष्टाहार विभाग में मुख्य सेविका हैं। बड़ी बेटी रोशनी कानपुर में रहकर पढ़ाई कर रही है। दो बहनें, सबसे छोटी निधि (21) और उससे बड़ी नीलम लखनऊ के अलीगंज स्थित पीजी हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी।
सुसाइड लेटर में घरवालों से मांगी माफी
शोकग्रस्त परिजन और पड़ोसी
- फोटो : अमर उजाला
निधि इलाहाबाद के एक प्राइवेट कालेज में बीएससी फाइनल करने के साथ ही एसएससी की कोचिंग कर रही थी। नीलम भी कोचिंग कर रही है। शनिवार को सुबह रोजमर्रा की तरह नीलम कोचिंग को चली गई। कमरे में निधि थी। नीलम करीब नौ बजे लौटकर आई तो हॉस्टल के कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। आवाज लगाने पर कोई जवाब नहीं मिला। मोबाइल पर कॉल भी रिसीव नहीं हुई।
नीलम ने आसपास की छात्राओं और हॉस्टल संचालक तथा अलीगंज पुलिस को सूचना दी। पुलिस दरवाजा तोड़ा तो देखा कि निधि अपने दुपट्टे के फंदे पर फांसी पर लटकी है। आननफानन दुपट्टा काटकर उसे ट्रामा सेंटर ले जाया गया। चंद मिनट बाद ही उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। कमरे में सुसाइड लेटर भी मिला। उसमें निधि ने अपने घरवालों से माफी मांगी है। मम्मी-पापा, दीदी, भाई से अपना ख्याल रखने को कहा है। उधर, खबर मिलते ही शनिवार को दोपहर बांदा से माता-पिता और भाई आदि लखनऊ पहुंच गए। पोस्टमार्टम आदि के बाद देर रात निधि का शव लेकर बांदा लौटे। रविवार को सुबह यहां हरदौली घाट में उसका अंतिम संस्कार किया गया।
निधि के सुसाइड का सदमा सिर्फ परिजनों को नहीं बल्कि पड़ोसियों को भी है। रविवार को यहां घर में निधि का पूरा परिवार खामोश और सदमे में था। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि कल फोन पर उनसे हंसमुख और खुशमिजाजी से बात करने वाली निधि अब उनके बीच नहीं रही। भाई राहुल ने बताया कि निधि ने शनिवार को सुबह करीब 6 बजे यहां घर में फोन किया था। पापा से बात की। फिर मम्मी से बात करती रही।
चलते वक्त निधि ने उससे कहा था कि जल्दी आ जाना...
शोकग्रस्त परिजन और पड़ोसी
- फोटो : अमर उजाला
उसके बाद उससे कुछ देर बात की। अपनी कोचिंग और पढ़ाई के बारे में बताती रही। कह रही थी कि प्रैक्टिकल के बाद उसके साथ दिल्ली चलेगी। निधि ने इंटर तक की पढ़ाई बांदा में ही की थी। दो वर्ष पूर्व बहन के साथ लखनऊ चली गई थी। छुट्टियों में या किसी अन्य खास मौके पर यहां घर आती रहती थी। दो माह पहले भी आई थी। परिजनों का कहना है कि वह नहीं समझ पा रहे हैं कि निधि ने यह नादानी क्यों कर ली?
क्या सोचा था? क्या हो गया?
वो मेरी लाडली बहन थी। मैं उसे पढ़ाने के लिए अपने साथ लखनऊ ले गई थी। क्या सोचा था? क्या हो गया? छोटी बहन निधि को गंवा बैठी बड़ी बहन नीलम यह कहकर फफक पड़ी। बताया कि निधि काफी आगे तक पढ़ना चाहती थी। नीलम ने बताया कि शनिवार को सुबह वह कोचिंग जाने से पहले निधि को चाय-नाश्ता कराकर गई थी।
चलते वक्त निधि ने उससे कहा था कि जल्दी आ जाना। उधर, हॉस्टल की छात्राओं ने हॉस्टल संचालक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए लखनऊ में हंगामा भी किया था। छात्राओं का आरोप था कि वह देर से आया। अगर वक्त पर आ जाता तो कमरा खोलकर निधि को फंदे से उतारकर अस्पताल ले जाया जाता। शायद उसकी जान बच जाती।