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UP: काइमरिक सेल थैरेपी से आनुवांशिक रोग नहीं रहेंगे लाइलाज, देश में पहली बार GSVM मेडिकल कॉलेज में दी जाएगी

Fri, 24 Jan 2025 04:26 PM IST
हिमांशु अवस्थी रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि देश में पहली बार स्टेम सेल थैरेपी के बाद अब काइमरिक सेल थैरेपी शुरू की जा रही है। इससे आनुवांशिक रोगों का इलाज किया जा सकेगा।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश में पहली बार काइमरिक स्टेम सेल थैरेपी जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में दी जाएगी। इस थैरेपी से लाइलाज माने जाने वाले आनुवांशिक रोगों का इलाज संभव हो जाएगा। मेडिकल कॉलेज ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। इस थैरेपी में रोगी की स्टेम सेल को उसके माता-पिता या सगे भाई-बहन की स्टेम सेल के साथ कल्चर कर काइमरिक सेल बनाई जाती है। इसे रोगी को दिया जाता है। यह इलाज जीन थैरेपी की तुलना में बहुत सस्ता होता है।

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आम रोगी इसका खर्च वहन कर सकता है। कॉलेज ने काइमरिक सेल बनाने वाली लैब से बात कर ली है। अभी तक 30 रोगियों ने थैरेपी के लिए बुकिंग कराई है। काइमरिक सेल थैरेपी अभी अमेरिका में दी जा रही है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में स्टेम सेल के इस नए रूप काइमरिक सेल से पहली बार इलाज किया जाएगा। काइमरिक थैरेपी न्यूरो मस्कुलर डिस्ऑर्डर, स्पाइन मस्कुलर डिस्ऑर्डर, लिंब गर्डल मस्कुलर डिस्ऑर्डर, मोटर न्यूरॉन डिजीज आदि रोगों में दी जाएगी।

काइमरिक सेल थैरेपी बहुत सस्ती होगी
मेडिकल कॉलेज के रिजनरेटिव मेडिसिन विभाग के विजिटिंग प्रोफेसर और स्टेम सेल थैरेपी विशेषज्ञ डॉ. बीएस राजपूत ने बताया कि अमेरिका ने इस थैरेपी से संबंधित पहली रिपोर्ट मार्च-अप्रैल में जारी की है। इस थैरेपी का इस्तेमाल अब देश में होगा। उन्होंने बताया कि यह जीन थैरेपी के विकल्प के रूप में काम करेगा। जीन थैरेपी में करीब 25 करोड़ का खर्च आता है, लेकिन काइमरिक सेल थैरेपी उसकी तुलना में बहुत सस्ती होगी।

आनुवांशिक रोगों का किया जा सकेगा इलाज
लैब में सेल कल्चर कराने के लिए 15 से 20 लाख रुपये खर्च करने होंगे। मुंबई की दो लैब स्टेम सेल कल्चर से काइमरिक सेल तैयार करती हैं। इस थैरेपी में किसी प्रकार के दुष्प्रभाव का खतरा नहीं रहता है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि देश में पहली बार स्टेम सेल थैरेपी के बाद अब काइमरिक सेल थैरेपी शुरू की जा रही है। इससे आनुवांशिक रोगों का इलाज किया जा सकेगा।
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ऐसे काम करती है काइमरिक सेल थैरेपी
रोगी के जीन में गड़बड़ी से एक खास प्रोटीन की कमी होती है जिससे आनुवांशिक रोग होते हैं। इस थैरेपी में रोगी और उसके मां-बाप, भाई-बहन की स्टेम सेल ली जाती है। डोनर की स्टेम सेल में प्रोटीन की कमी नहीं होती। रोगी और डोनर की सेल जब कल्चर करके काइमरिक सेल बनाई जाती है तो वह प्रोटीन नई सेल में आ जाता है। काइमरिक सेल जब रोगी को दी जाती है तो उसमें उस खास प्रोटीन की कमी दूर होती है और बीमारी ठीक होने लगती है। 20 लाख काइमरिक सेल प्रति किग्रा शरीर के वजन के हिसाब से रोगी की दी जाती हैं।
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