दोनों की थी जिद, हार गए परिजन
बताया तीन दिन पहले रीता उनके पास पहुंचीं। पुत्री सुनीता को अपनी बीवी बताते हुए साथ ले जाने की जिद पर जमकर हंगामा किया। दोनों की जिद के सामने परिवार वालों ने हार मान ली। पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश दोनों के मिलन में बाधा बन गया।
कोर्ट ने भी कर दिया था मना
शनिवार को कोर्ट मैरिज करने कस्बे की सिविल कोर्ट पहुंचीं युवतियों को अधिवक्ताओं ने कोर्ट के आदेश का हवाला देकर शादी कराने से मना कर दिया। इसके बाद दोनों निराश होकर लौट गईं। 29 दिसंबर 2018 को राठ क्षेत्र की दो युवतियों ने भी समलैगिंक विवाह कर लिया था।
2018 में दो युवती रचा चुकीं हैं समलैगिंक विवाह
29 दिसंबर 2018 को राठ क्षेत्र की दो युवतियों ने भी समलैगिंक विवाह कर लिया था] जिसे मान्यता नहीं दी गई थी। एक बार फिर से जिले में समलैगिंक विवाह का मामला राठ क्षेत्र में सामने आया है।
रीता ने सुनीता की मांग में भरा सिंदूर
बचपन से साथ खेली दो सहेलियों को आपस में प्यार हो गया। प्यार परवान चढ़ने पर मंदिर में रीता ने सुनीता की मांग में सिंदूर भर दिया। पंजीकृत शादी के लिए शनिवार को दोनों सिविल कोर्ट पहुंच गईं। जहां अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन होने का हवाला देते हुए समलैंगिक विवाह कराने से इन्कार कर दिया।
नोटरी पर इकरारनामा भी किया
इसके बाद लोकलाज के भय से दोनों के परिवार वालों ने विरोध किया। लेकिन रीता की दबंग छवि ने सुनीता के हौसले को भी बढ़ा दिया। छह माह पहले दोनों राजकोट भाग गईं थीं, जहां दो माह साथ रहने के बाद वापस आ गईं थीं। गांव के मंदिर में शादी रचाने के बाद दोनों ने नोटरी पर इकरारनामा भी कर लिया था।