बुद्ध स्थली संकिसा जहां गौतम बुद्ध ने दिया था ज्ञान
संकिसा (फर्रुखाबाद) ही वो तपस्थली हैैै जहां 2 हजार 561 वर्ष पहले भगवान बुद्ध ने आकर ध्यान किया था। उन्होंने अपने प्रिय शिष्य आनंद को जीवन जीने की कला यहीं सिखाई थी। बुद्ध से जुड़ी तमाम जानकारियां देते हुए यहां के अध्यक्ष डॉ. धम्मपाल थेरो ने बताया कि जब आनंद की अध्यात्म में रुचि बढ़ी तो उसने सन्यास ले लिया और वह नंगे पांव कांटाें में चलने लगा। आनंद के इस हठ योग को देखकर भगवान बुद्घ ने उसे बताया कि जीवन वीणा की तरह है। वीणा के तार यदि अधिक कस दिए जाएं तो वह टूट जाएंगे और यदि उन्हें ढीला छोड़ दिया जाए तो उनमें संगीत पैदा नहीं हो सकता है। वीणा में संगीत पैदा करने के लिए मध्य स्थिर में लाना जरूरी हैै।
डॉ थेरो ने कहा कि आजकल रागी को यह अभिमान है कि उसने अरबाें की संपत्ति अर्र्जित कर ली है। वैरागी को यह अहंकार है कि उसने धन दौलत और महलाें में ठोकर मार दी। राग और विराग दोनाें एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। बीच की स्थिति बीतराग में बनती है। जो बीतराग में जीने लगता है। उसे जीने की कला आ जाती है।
उन्होंने कहा कि हठ योग के जरिए शरीर को नष्ट जरूर किया जा सकता है, लेकिन जीवन जीने की कला नहीं सीखी जा सकती। उन्होंने बताया कि भगवान बुद्ध यहां कई दिन रहे। इस वजह से यह स्थान शांति का एकलव्य हो गया है। यहां आने वाले हर व्यक्ति को शांति मिलती है। अध्यक्ष धम्मपाल ने बताया कि 2 हजार 561 वर्ष पहले बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध ने जन्म लिया था। पूर्णिमा के दिन ही उन्हाेंने शरीर त्यागा था। उनको ऐशो आराम के सभी साधन उपलब्ध कराए गए, लेकिन उनके अंदर जल रही बुद्धत्व की ज्योति और प्रबल होती गई। उन्हाेंने राजपाठ छोड़कर विश्व शांति का संदेश दिया।
बुद्ध ने न खंडन किया न मंडन
पूजा अर्चना करते बौद्ध अनुयायी।
मैनपुरी के कुरावली से आईं रोमी का कहना है कि तथागत ने न तो किसी भी चीज का न तो खंडन किया है और न ही मंडन किया है। तथागत ने भगवान को खोज का विषय बताया है। वह न तो किताबाें से प्राप्त हो सकता है और न ही दूसराें से ज्ञान अर्जित करने के बाद। जिस तरह दूध के अंदर मक्खन छिपा हुआ हैै, पर वह प्रार्थना से प्राप्त नहीं हो सकता।
उसी तरह परमात्मा को जानने के लिए ध्यान में डुबकी लगाना जरूरी है। संकिसा में आयोजित बुद्ध जयंती कार्यक्रम में युवतियाें की भागीदारी इस भी बार ज्यादा रही।
बौद्ध धर्म से प्रभावित होकर आध्यात्म में उतरीं इन युवतियाें का मानना है कि बौद्ध धर्म हिंदू धर्म से निकला हुआ एक फूल है। उन्हाेंने मनुष्य को ही भगवान माना है। मनुष्य से बड़ा और कोई भगवान नहीं है। वह हर व्यक्ति के अंदर विराजमान है।
बचपन से ही भाया बौद्ध धर्म
इटावा से आईं गीता शाक्य का कहना है कि उन्हें बचपन से ही बौद्ध धर्म भा गया। तथागत के उपदेशों में उन्हें सच्चाई नजर आई। उन्हाेंने गृहस्थ धर्म को सबसे बड़ा धर्म बताया। तथागत 12 वर्ष तक अखंड साधना करने के बाद जब बोधि को उपलब्ध हुए तो वह जंगल की ओर नहीं गए, बल्कि अपने घर यशोधरा के पास गए। तथागत को देखकर यशोधरा उनके पैराें पर गिर पड़ी और बुद्धं शरणं गच्छामि का मंत्र जप उनकी शिष्य बन गईं। राहुल भी तथागत का अनंय भक्त बना।
शांति और आनंद से जीने का नाम है बौद्ध धर्म
बुद्ध का संदेश बताते भंते धम्मपाल थेरो
भंते धम्मपाल थेरो का कहना है कि भगवान बुद्ध ने अपने सन्यासियाें को जीवन जीने की कला सिखाई है। उन्हाेंने परमात्मा को खुद जानने और ध्यान के माध्यम से उसे पहचानने का मंत्र दिया है। भगवान बुद्ध ने संसार में कुछ भी त्यागने की बात नहीं कही है और न ही पकड़ने की बात कही है। जिस स्थिति में हो उसे स्वीकार कर लेना और उसमें जीना ही सच्चा धर्म है।
तपस्थली की परिक्रमा, बुद्ध की देशनाआें का संदेश
भगवान बुद्ध की तपस्थली संकिसा (फर्रुखाबाद) में देश भर से आए बौद्ध अनुयायियाें, भंते व भिच्छुआें ने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर परिक्रमा की। बौद्ध स्तूप पर जाकर पूजा अर्चना की। भंते धम्मपाल थेरो ने भगवान बुद्ध की देशनाआें का संदेश दिया।
युवा बुद्ध कल्याण समाज की ओर से आयोजित कार्यक्रम में प्रात: 7 बजे से 10 बजे तक बौद्ध बिहार से लेकर बौद्ध स्तूप संकिसा तक शोभायात्रा निकाली गई। इसमें जन्म, शिक्षा और मृत्यु की झांकियां सजाकर लोगाें को भगवान बुद्ध की देशनाआें का संदेश दिया गया। 10:30 से 11:30 बजे तक संघगान किया गया। 12 बजे से 12:30 तक सभा का आयोजन किया गया। बुद्ध पूर्णिमा के महत्व को बताते हुए कहा गया कि इस दिन भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी।
बौद्ध भिक्षु धम्मपाल थेरो ने तथागत के पदचिन्हाें पर चलकर अध्यात्म की अलख जगाए रखने का आहवान किया। इस मौके पर प्रमुख रूप से भंते गुरसागर, सीलसागर, गुणानंद, भंते जय सिंह, नागेंद्र सिंह शाक्य, होरीलाल शाक्य, गीता शाक्य, रोमी शाक्य, सरिता शाक्य, पवन शाक्य, रघुवीर, सुधीर कुमार शाक्य आदि लोग मौजूद रहे।
बुद्ध पूर्णिमा पर निकाली प्रभात फेरी
नगर से निकलती भगवान बुद्व की जयंती पर प्रभात फेरी
भारतीय बौद्घ महासभा की ओर से लालकुआं रोड स्थित गल्ला मंडी चौराहे से प्रभात फेरी निकाली गई। यह रैली नगर के लोहाई बाजार, श्यामगेट, बजरिया, तहसील रोड, पुलगालिब चिलांका, पटवनगली, पृथ्वीदरवाजा, होती हुई बुद्ध बिहार चिलौली स्थित अंबेडकर मूर्ति पर जाकर सभा में परिवर्तित हुई। सभा के दौरान भगवान बुद्ध के जीवन पर प्रकाश डाला गया। इस मौके पर महासभा के डॉ. केपी सिंह, बादाम सिंह, सोनेलाल, सुभाष चंद्र, कर्मवीर शाक्य, मनोज कुमार, मोतीलाल बौद्घ, राम सिंह एडवोकेट, विजेंद्र सिंह, महेश चंद्र शाक्य, अनोखे लाल फौजी, नरेंद्र सिंह, बुद्घप्रकाश, श्रीपाल बौद्घ, सतीश चंद्र, सुरेंद्र सिंह आदि लोग मौजूद रहे।