भाजपा सरकार के केंद्र में सत्ता संभालने के बाद गंगा के प्रदूषण को दूर करने के लिए कई नई योजनाएं घोषित की गईं। पहला और बड़ा काम यह हुआ कि सरकार ने गंगा नाम से एक मंत्रालय भी बना दिया। इसके साथ काम करने के लिए नमामि गंगे नाम से एक एजेंसी भी बनाई गई। नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले चार साल में गंगा को निर्मल बनाने के लिए गंगा मंत्रालय और नमामि गंगे की तरफ से 1200 करोड़ से अधिक की योजना शुरू की। इसके बावजूद गंगा में प्रदूषण की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया। इतना जरूर है कि चार साल में कानपुर की गंगा में कुछ काम होते दिखने लगा है। प्रदूषण कब दूर होगा, इसकी गारंटी सरकार के पास नहीं है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगली सरकार आने के बाद अभी जो योजनाएं बनी हैं, यदि उस पर तेजी से अमल होता रहा तो गंगा का जल निर्मल हो सकता है। गंगाजल आचमन के लायक हो पाएगा इस पर भी संदेह है।
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