कानपुर में गंगा प्रदूषण की ये है हालत
नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल की सख्ती के बावजूद मकर संक्रांति पर ‘कानपुर का गंगाजल’ स्नान लायक नहीं हो सका। गंगा में गिरते नालों पर रोक नहीं लग सकी। शुक्रवार को जाजमऊ और अन्य सभी जगह नालों के रास्ते गंगा की जलधारा में गंदा पानी घुलता रहा। कई टेनरियों और ग्लू भट्ठियों का जहर भी गंगा में जाता रहा। जगह-जगह गंगाजल काला दिखा। कई दिन से गंगाजल साफ करने के लिए सक्रिय संतों ने गंगा से हाथ जोड़कर क्षमा मांगी, कहा हम आपको स्वच्छ नहीं कर सके इसलिए क्षमामि हे गंगे।
रात में चलती हैं टेनरी
बाहर गेट पर ताला और रात के अंधेरे में टेनरियां चलती रहीं। कुछ के कनेक्शन कटे हैं, लेकिन विद्युत विभाग के कर्मी अपनी जेब गर्म कर उनकी कटी लाइन रात में जोड़कर सुबह तार हटा देते हैं। इससे टेनरियां न चलने का अफसरों का दावा मिट्टी में मिलता रहा। दो दिन पहले डबकेश्वर घाट पर नाला बंद करने के लिए बालू की सैकड़ों बोरियां डलवाने वाले बाल योगी अरुण पुरी महाराज ने कहा कि केंद्रीय मंत्री उमा भारती को संत समाज को बड़ी उम्मीद थी। मगर निराशा हाथ लगी।
अवैध ग्लू भट्ठियों पर कार्रवाई नहीं
गंगा के मुहाने पर स्थित वाजिदपुर, प्योंदी, जाजमऊ पुरानी चुंगी, हरदेव कुटी में 80 से अधिक ग्लू भट्ठियां चलती रहीं। इसमें चमड़े को केमिकल डालकर गलाया जाता है। सख्ती के कारण भट्ठियां शाम पांच बजे के बाद जलाई जाती हैं और फिर रात भर गंगा में जहर बहाया जाता है। इन भट्ठियों को हटाने के लिए प्रशासन की ओर से आदेश हो चुका है। बावजूद इसके एक भट्ठी पर भी बुलडोजर नहीं चलाया गया।