उत्तराखंड और यूपी में भाजपा की सरकार आने के बाद गंगा को अब नया जीवन मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। पिछले करीब 20 वर्षों से गंगा को प्रदूषण मुक्त करने की योजनाओं और गंगा की हालत पर नजर दौड़ाई जाए तो योजनाओं में कई अरब की राशि खर्च हो गई लेकिन गंगा में प्रदूषण घटने के बजाए बढ़ता ही गया है।
हरिद्वार से चलकर बनारस के बीच तक गंगा का प्रदूषण सबसे ज्यादा रहता है। यह रिपोर्ट केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कई बार जारी कर चुका है। गंगा में प्रदूषण सबसे ज्यादा कानपुर और इसके आसपास के जनपदों में रहता है। यूपी में सरकार बनने के बाद जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने एक चैनल को दिए गए बयान में कहा था कि गंगा का प्रदूषण वास्तविक रूप से अब दूर होगा।
उनका आरोप है कि अभी तक यूपी सरकार का सहयोग नहीं मिलने से गंगा को लेकर किसी भी योजना को पूरा करने में दिक्कत आ रही थी। केंद्र में भजापा की सरकार आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा की निर्मलता और अविरलता को बनाए रखने के लिए नमामि गंगे मिशन की शुरुआत की थी। इस मिशन को अब सरकार के प्राधिकरण के रूप में स्थापित कर दिया है।
गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए दोनों राज्यों में ंसरकार होने के साथ-साथ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अभी केंद्र के नमामि गंगे मिशन के राष्ट्रीय संयोजक भी हैं। इससे साफ जाहिर है कि यूपी और उत्तराखंड दोनों सरकारों की तरफ से जल्द ही गंगा एक्शन का नया प्लान सामने आएगा। इस बीच मिशन फॉर क्लीन गंगा के सलाहकार संजय चतुर्वेदी ने बताया कि दोनों प्रदेशों में सरकारों का गठन हो गया है, अब सभी रुके कार्यों की रिपोर्ट विभागों से मांगी जाएगी।