राष्ट्रीय गंगा परिषद की 14 दिसंबर को यहां होने वाली पहली बैठक में गंगा को अविरल-निर्मल बनाने के लिए सहायक नदियों में भी गंदगी जाने से रोकने के लिए कार्ययोजना बनने की संभावना है। प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर सख्ती और बढ़ाने के लिए नई गाइड लाइन जारी हो सकती है।
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चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते पीएम मोदी
- फोटो : अमर उजाला
नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) के अफसरों की तरफ सेे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने पेश करने के लिए तैयार किए गए पावर प्रजेंटेशन में सीसामऊ नाला और हरिद्वार में गंगा को सबसे ज्यादा गंदा करने वाले नालों की तब और अब टैपिंग के बाद की स्थिति दिखाई जाएगी। 2020 से 2035 तक की कार्ययोजना का खाका रखा जाएगा। शुक्रवार को एनएमसीजी के अफसर लैंडमार्क में घंटों बैठक के एजेंडे पर मंथन करते रहे।
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सीएसए में पीएम मोदी के साथ सीएम योगी
- फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार को सुबह 11:10 बजे चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में होने बैठक में गोमुख से गंगासागर तक गंगा और इसकी सहायक नदियों स्वच्छ रखने के लिए उनमें गिरने वाले नालों, उद्योगों के प्रदूषित पानी को मिलने से रोकने पर जोर रहेगा। जो उद्योग जितना प्रदूषण फैलाएंगे, उसे उन्हीं से नियंत्रित कराने पर जोर रहेगा।
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सीएसए पहुंचे पीएम की कुछ झलकियां
- फोटो : अमर उजाला
करीब पौने दो घंटे चलने वाली इस बैठक में गंगा की धारा को वर्षभर निर्मल और अविरल बनाए रखने पर भी फोकस रहने की संभावना है। खासकर नवंबर से फरवरी तक गंगा में पानी का प्रवाह बरकरार रखने के लिए बांधों पर ध्यान देने पर जोर रहेगा। एनएमसीजी के अधिकारियों का मानना है कि यदि गंगा में पर्याप्त संख्या में बांध होंगे तो उन दिनों में भी गंगा में पर्याप्त पानी उपलब्ध रहेगा, जिन दिनों में इसमें कम पानी रहता है।
इसके लिए उत्तराखंड के लखवाड़ बांध की अधूरी परियोजना को पूरा करना, हिमाचल प्रदेश के किसाऊ बांध और रेणुका झील आदि मेें बरसात के दिनों में पर्याप्त जल संचय करना शामिल है।
इन बिंदुओं पर रहेगा फोकस
- गंगा में नालों को गिरने से रोकना
- गंगा में मिलने वाली सहायक नदियों की सफाई
- जो प्रदूषण फैलाएगा, वही उसे नियंत्रित करेगा
- निर्मल धारा, अविरल धारा के लिए पानी का बहाव नवंबर से फरवरी के बीच भी लगातार बना रहे, इसके लिए बांधों की अधूरी परियोजनाओं को पूरा करना
- जलीय जंतुओं का जीवन
- नदी के आसपास औषधीय पौधे लगाना
- घाटों की मरम्मत और सफाई
- नए घाटों का निर्माण
- खुले में शौच न होना