- लाइन डालने के लिए एनजीटी ने संबंधित विभागों से मांगा प्रस्ताव
- टेनरी और सीवेज से होने वाले प्रदूषण का अलग-अलग हो सकेगा आकलन
- छह को एनजीटी की सुनवाई में प्लान पर होगी चर्चा
कानपुर में गंगा किनारे स्थापित औद्योगिक इकाइयों (टेनरी) का हानिकारक कचरा और सीवरेज अब अलग-अलग लाइन से एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) तक भेजे जाने की तैयारी है।
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टेनरी और सीवेज के प्रदूषण का अलग-अलग हो सकेगा आकलन
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इससे जहां टेनरी की ओर से होने वाले प्रदूषण और सीवेज के प्रदूषण का अलग-अलग आकलन हो सकेगा, वहीं ओवरफ्लो की समस्या से भी निजात मिलेगी।
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ओवरफ्लो होने पर कई बार बगैर शोधित हुए ही कचरा गंगा में जाता है
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दरअसल ओवरफ्लो होने पर कई बार बगैर शोधित हुए ही कचरा गंगा में चला जाता है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने अलग लाइन डालने के लिए जल निगम, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्रस्ताव तैयार करने को कहा है।
अब दिल्ली स्थित ट्रिब्युनल में सुनवाई
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इस प्रस्ताव पर छह फरवरी को दिल्ली स्थित ट्रिब्युनल में सुनवाई होगी। बता दें अभी एक ही लाइन से दोनोें तरह के कचरे एसटीपी तक शोधन के लिए भेजे जाते हैं।
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एनजीटी ने कहा था कि प्रदेश सरकार टेनरियों को गंगा किनारे से हटाना नहीं चाहती
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गंगा में प्रदूषण के मसले पर अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाने की स्थिति में पिछले दिनों एनजीटी ने कहा था कि यदि प्रदेश सरकार टेनरियों को गंगा किनारे से हटाना नहीं चाहती है, तो गंगा में जाने वाले प्रदूषण को रोकने का क्या तरीका है, इसकी जानकारी दे। ट्रिब्युनल को जो रिपोर्ट दी गई थी, उसमें कहा गया कि सिर्फ टेनरियां ही नहीं गंगा में प्रदूषण सीवरेज के कचरे से भी होता है।
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सीवरेज और टेनरियों के कचरे को ले जाने के लिए अलग- अलग लाइन
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इस पर ही एनजीटी ने कहा था कि ट्रीटमेंट प्लांट तक सीवरेज और टेनरियों के कचरे को ले जाने के लिए अलग लाइन डाली जाए। यह सब कैसे होगा इसका प्लान संबंधित विभाग बनाकर देंगे।
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टेनरी संचालकों से हो चुकी है
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उप्र टेनर्स एसोसिएशन के एग्जिक्यूटिव मेंबर डॉ. फिरोज आलम का कहना है कि विभागीय अधिकारियों की तरफ से इस संबंध में टेनरी संचालकों से बात हुई है।
नए प्लांट के लिए केंद्र की हरी झंडी का इंतजार
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नए प्लांट के लिए केंद्र की हरी झंडी का इंतजार
एनजीटी और प्रदेश सरकार के साथ करीब तीन महीने पहले हुई केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की बैठक में तय हुआ था कि टेनरियों के लिए अलग से ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जाए। 2.5 करोड़ लीटर क्षमता वाले इस प्लांट का डीपीआर तैयार करके प्रदेश सरकार ने बजट स्वीकृति के लिए केंद्र को करीब दो महीने पहले ही भेज दिया है।
सीवर के कचरे के साथ टेनरियों के कचरे का होता है ट्रीटमेंट
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अभी तक वहां से स्वीकृति नहीं मिल पाई है। इस प्लांट की कुल लागत 400 करोड़ रखी गई है। अभी तक टेनरियों के कचरे का ट्रीटमेंट सीवर के कचरे के साथ ही किया जाता है। चूंकि हानिकारक कचरे की मात्रा प्लांट की क्षमता से कई गुना अधिक है, इसलिए नए प्लांट की योजना बनाई गई है।
आज से तीन दिन बंद रहेंगी टेनरियां
माघ के स्नान को देखते हुए 29 जनवरी से तीन दिन के लिए टेनरियों को बंद कर दिया गया है। इससे पहले मौनी अमावस्या के स्नान के लिए भी टेनरियों में काम बंद किया गया था। अब बसंत पंचमी का स्नान होना है। स्नान पर्व में टेनरियों को बंद रखने का आदेश प्रशासन की तरफ से कि या गया है।