कटरी में हटाए गए थे अवैध कब्जे
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कानपुर के हिस्ट्रीशीटर रामदास अपनी दहशत की वजह से किसानों के खेत और सरकारी जमीनें कब्जा करता था। बिल्डरों से मोटी रकम लेकर जमीन उनके सुपुर्द कर देता था। इसकी कोई लिखापढ़ी नहीं करता था। इसके आगे बिल्डर कागज तैयार कर रियल एस्टेट कंपनी में इन जमीनों को शामिल कर ऊंचे दामों पर बेच देते थे।
ये खुलासा खुद रामदास ने पूछताछ में किया है। कोहना इंस्पेक्टर ने बताया कि अभी तक जो दस्तावेज मिले हैं, उसमें लिखापढ़ी में रामदास का नाम नहीं है। मगर गवाहों के बयान और बैंक ट्रांजेक्शन उसके खिलाफ हैं। दरअसल रामदास सरकारी जमीनों को अपने नाम पर नहीं लिखवाता था। न ही उसके पास दस्तावेज रहते थे। वो जमीन पर कब्जा कर चारों तरफ से घिरवा देता था। उसके बाद जमीन बिल्डरों के हवाले कर देता था। शूटिंग रेंज की जमीन पर भी रामदास ने यही खेल किया था।
मोबाइल रखना कर दिया था बंद
पुलिस की तीन टीमें तीन सप्ताह से रामदास को तलाश रही थीं। आखिर में मुखबिरों की मदद से पुलिस उस तक पहुंची। जांच में पता चला कि केस दर्ज होने के बाद से रामदास ने मोबाइल रखना बंद कर दिया था। जरूरत पड़ने पर किसी दूसरे के मोबाइल से बात कर लेता था।
दो लेखापाल समेत तीन अफसरों के बताए नाम
पुलिस ने रामदास से कई घंटे पूछताछ की। पुलिस सूत्रों के मुताबिक रामदास ने प्रशासनिक अफसरों से मिलीभगत बात स्वीकारी है। उसने दो लेखापाल व एक अन्य प्रशासनिक अफसर का नाम भी बताया है। पुलिस ने तीनों के खिलाफ साक्ष्य जुटाना शुरू कर दिया है।