गंगा बैराज के डेथ प्वाइंट पर सुरक्षा बंदोबस्त के मद्देनजर बीजी जाली (विशेष प्रकार की) लगाने में एक करोड़ 51 लाख रुपये खर्च होगा। सेंट्रल बार एसोसिएशन के महामंत्री प्रवीण फाइटर की शिकायत पर उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने गंगा बैराज पर सात लोगों की मौत के मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी से उचित कार्रवाई को कहा था। इस पर अधिशासी अभियंता बैराज निर्माण खंड दो ने अधीक्षण अभियंता बैराज निर्माण मंडल को पत्र भेजकर बजट मांगा है।
सेंट्रल बार एसोसिएशन के महामंत्री प्रवीण फाइटर ने मानवाधिकार आयोग से शिकायत की थी। इसमें कहा गया था कि 22 जून 2016 को गंगा बैराज पर गंगा में संदीप, गोलू, सचिन, रोहित, सत्यम, शिवम और उनको डूबने से बचाने में मकसूद की मौत हो गई थी। जहां पर यह छात्र डूबे थे उस स्थान को डेथ प्वाइंट कहा जाता है। इसलिए वहां पर सुरक्षा के बंदोबस्त किए जाएं। छात्रों को डूबने से बचाने में अपनी जान गंवाने वाले मकसूद को आर्थिक मदद दी जाए। आयोग ने जिलाधिकारी से इस मामले पर उचित कार्यवाही करने को कहा था।
मालुम हो कि ‘अमर उजाला’ ने यह मामला घटना के बाद से ही उठाया था। इस पर जिला प्रशासन ने अस्थाई जाली लगवा दी थी। अब मानवाधिकार आयोग के संज्ञान लेने केबाद पुल पर नदी की ओर और डाउन स्ट्रीम में बीजी जाली लगाई जाएगी। बीजी जाली अन्य जाली की अपेक्षा मोटी होती है। इसमें बीच-बीच में एक इंच की जगह होती है। बैराज पर आठ फिट ऊंची जाली लगाई जाएगी। यह ऊपर की ओर एक फुट 45 डिग्री पर झुकी होगी। इस कारण इस जाली को कोई क्रास नहीं कर सकेगा। अभी कानपुर में बीजी जाली झकरकटी पुल पर लगी है।