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‘धरती के केंद्र’ से दूर हुईं गंगा, जानिए क्या संदेश दे रहे हैं ब्रह्मखूंटी के पुजारी

Mon, 16 Oct 2017 12:50 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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ब्रह्मखूंटी से दूर हुई गंगा
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बिठूर के ऐतिहासिक ब्रह्मावर्त घाट से गंगा का पानी दूर हो चुका है। इसी ब्रह्मावर्त घाट पर ब्रह्म खूंटी है। मान्यता है कि यही धरती का केंद्र है। पुजारियों के अनुसार पहली बार ऐसा हुआ है, वरना मई-जून की गर्मी में भी घाट की सीढ़ियों के पास तक गंगा जल रहता था।  श्रद्धालुओं से भरा रहने वाला ब्रह्म खूटी मंदिर सूना पड़ा है।
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नमामि गंगे परियोजना के तहत घाटों का सुंदरीकरण तो नहीं हो पाया लेकिन इस कार्य में लापरवाही की वजह से कानपुर बिठूर के ऐतिहासिक ब्रह्मावर्त घाट से गंगा लगभग 15 मीटर दूर हो गई। सीढ़ियों से मुख्य धारा के बीच बालू और नाले का गंदा पानी नजर आ रहा है।
बिठूर से जाजमऊ तक नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत गंगा के सभी प्रमुख घाटों का सुंदरीकरण होना है। अक्तूबर 2016 से सुंदरीकरण कार्य की शुरुआत बिठूर के छप्पर घाट से हुई। तीन घाटों पर काम चल रहा है। एक साल हो गया। इसी साल दिसंबर तक सभी प्रमुख घाटों का सुंदरीकरण पूरा होना है, लेकिन अभी तक एक भी घाट का कायाकल्प नहीं हुआ। उल्टे इन दिनों बिठूर के घाटों से गंगा दूर हो गईं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि ब्रह्मावर्त घाट कभी भी सूखा नहीं रहा, अब एक महीने से यहां आचमन तक के लिए गंगाजल नहीं है। दलदल-गंदगी के कारण श्रद्धालु गंगा की धारा तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। 
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विशेषज्ञों के अनुसार बरसात का मौसम शुरू होने से पहले घाटों के सुंदरीकरण के दौरान बहाव रोकने के लिए लगाई गई बालू भरी बोरियां बरसात का मौसम शुरू होने से पहले नहीं हटाई गईं। संभव है बाढ़ आने पर इन बोरियों की वजह से पानी का बहाव उन्नाव जिले की तरफ हुआ हो और इस तरफ बहाव कम होने की वजह से धीरे - धीरे बालू इकट्ठी होती गई। अब ऊपर (नरौरा) से पानी घटने पर यही बालू नजर आने लगी और गंगा की धारा दूर होने लगी। यदि बरसात शुरू होने से पहले बोरियां हटा दी गई होतीं तो यह दिक्कत न होती।
पुजारी जयंत कुमार शुक्ला का कहना है कि छप्पर, झांसी की रानी, पांडु, कौरव, श्रवण, भैरो और ब्रह्मावर्त घाट किसी पर भी पानी नहीं है। निर्माण कार्यों के लिए गंगा की धारा को घाटों पर आने से बालू भरी बोरियों से रोक दिया गया है। गंगा घाट से दूर हैं। दलदल-गंदगी के कारण कोई वहां तक नहीं पहुंच पाता है। काम बेहद सुस्त गति से हो रहा है। एक साल में सिर्फ छप्पर घाट पर कुछ काम दिख रहा है। 
 

बाल्टी में गंगाजल भरकर कराया स्नान 

इतिहास में पहली बार बिठूर के ब्रह्मावर्त घाट पर आचमन तक को जल नहीं
जालौन के शहजादेपुर गांव के रहने वाले ओम प्रकाश डेढ़ साल पहले दुर्घटना में सुधबुध खो बैठे हैं। एक महंत के कहने पर रविवार को घरवाले उन्हें ब्रह्मावर्त घाट पर स्नान कराने लाए। उन्हें बाल्टी में जल भरकर भाभी ने स्नान कराया। भाभी दीपाली ने बताया कि  महंत ने कहा था कि बिठूर के ब्रह्मावर्त घाट पर स्नान और ब्रह्म  की चरण पादुकाओं के दर्शन से लाभ मिलेगा लेकिन घाट का हाल देखकर बहुत दुख हुआ।
 

गंगा स्नान के बाद मंदिर दर्शन का विशेष महत्व

जीर्णोद्धार के नाम पर एक महीने से सूखे पड़े है बिठूर के पांचों घाट
ब्रह्म खूंटी मंदिर के पुजारी अशोक दीक्षित का कहना है कि मान्यता के अनुसार ब्रह्म खूंटी विश्व का केंद्र बिंदु है। ब्रह्मा जी के सिर्फ दो ही मंदिर हैं। एक पुष्कर में जहां उनकी प्रतिमा है और दूसरा बिठूर जहां उनके चरण हैं। मां गंगा के स्नान के बाद मंदिर में दर्शन करने का विशेष महत्व है। घाटों पर पानी न होने से श्रद्धालु परेशान होते हैं। 
 

दलदल-गंदगी देख श्रृद्धालु वापस जा रहे, मंदिर में सन्नाटा
एक साल काम चल रहा है लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। हालात बदतर हो गए हैं। भक्तों ने आना बंद कर दिया है।- जयंत कुमार शुक्ला, पुजारी
गंगा स्नान के साथ ब्रह्मा जी के दर्शन करने के लिए भक्त आते हैं। इस समय संख्या काफी कम हो गई है।- राजू दीक्षित, गंगा सफाई अभियान कार्यकर्ता  
ब्रह्मावर्त घाट पर स्नान करने के लिए शहर से आए थे। घाट के हाल देख मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।- नीरज द्विवेदी ,किदवई नगर 
बेटे के साथ गंगा स्नान को आए थे। घाट पर सिर्फ नाले का पानी आ रहा है। ऐसे जल से कैसे आचमन कर सकते हैं। -सुमन देवी,  किदवई नगर 
बिठूर से जाजमऊ तक नवंबर 2018 तक काम खत्म करना है। बारिश के चलते इस साल मई में काम रोक दिया गया है। अगले महीने से तेजी से काम शुरू किया जाएगा। 
- श्रीकृष्ण  दीक्षित, नमामि गंगे प्रमुख उत्तर प्रदेश
 
बिठूर में दो घाटों पर निर्माण कार्य कर दिया गया है। सीढ़ियों के नीचे पटरी बनाकर ऐसी डिजायन होगी, जिससे गंगा स्नान करने वाले श्रद्घालुओं के  डूबने का खतरा बिल्कुल खत्म हो जाएगा। निर्माण के चलते पानी को रोका गया है। मार्च 2018 तक बिठूर के सभी घाटों को चमका दिया जाएगा।
- आरके सिंह, प्रदेश प्रभारी, इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड 
 
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नरौरा से छोड़ा गया पानी

गंगा घाट से दूर
30 सितंबर - 28000 क्यूसेक
7 अक्तूबर - 16000 क्यूसेक
8 अक्तूबर - 12000 क्यूसेक
9 अक्तूबर - 12000 क्यूसेक
10 अक्तूबर - 11000 क्यूसेक
11 अक्तूबर - 11000 क्यूसेक
12 अक्तूबर - 9000 क्यसेक
13 अक्तूबर - 9000 क्यसेक
14 अक्तूबर - 9000 क्यूसेक 
15 अक्तूबर - 9000 क्यूसेक

इन घाटों का होना है सुंदरीकरण
बिठूर, गंगा बैराज, भैरोघाट, परमट, सरसैया घाट,  गुप्तार घाट, मैस्कर घाट, कोयला घाट, सिद्घनाथ घाट।

घाटों पर होने हैं ये काम 
घाट पर पानी के नीचे पत्थर (फर्श), रेलिंग, पुर्ताई, महिलाओं के कपड़े बदलने के लिए कमरा, बायो टायलेट, कूड़े एकत्र करने के लिए डस्टबिन, श्मशान घाट का सुंदरीकरण।
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