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यूपी: कानपुर में बदले जा रहे चोरी के वाहनों के चेचिस नंबर, 35 से ज्यादा रसूखदार पुलिस के रडार पर

Wed, 06 Jan 2021 05:03 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
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पकड़े गए चोरी के वाहन - फोटो : अमर उजाला
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करोड़ों रुपये के चोरी के वाहन प्रदेश भर के नेता और कारोबारी मोटी कमाई के साथ रसूख जमाने में इस्तेमाल कर रहे हैं। इटावा पुलिस की जांच में करीब 35 ऐसे रसूखदार और प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आ रहे हैं। पूर्वी और पश्चिमी यूपी के इन बड़े कारोबारियों और नेताओं से पुलिस जल्द ही पूछताछ करने वाली है।
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इसके अलावा संभागीय परिवहन कार्यालयों के दर्जनों अफसर और बाबू भी पुलिस की रडार पर हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक कानपुर में गाड़ियों के चेचिस नंबर बदलने के बाद रजिस्ट्रेशन के लिए नगालैंड और मणिपुर पहुंचाई जा रही हैं।

इटावा पुलिस ने सोमवार को चोरी के 41 वाहनों को बरामद कर तीन दलालों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद शुरू हुई पड़ताल में सामने आया कि इटावा, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, आगरा, कानपुर और पूर्वी यूपी के कई जिलों के कारोबारियों और नेताओं ने चोरी के इन ट्रकों व लग्जरी कारों को खरीदा था।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक कार्रवाई के दौरान कानपुर देेहात के एक विधायक के रिश्तेदार के यहां से एक गाड़ी बरामद हुई है। पुलिस ने उसे पकड़कर पूछताछ की लेकिन गाड़ी का पंजीकरण उसके नाम पर न होने की वजह से छोड़ना पड़ा। पकड़े गए दलालों से पूछताछ में गाड़ियों के कुछ खरीदारों और आरटीओ के अफसरों के नाम सामने आए हैं।

इनमें ज्यादातर अधिकारी 2010 से 2019 तक इटावा और औरैया जिले में तैनात रहे हैं। पुलिस इनका पता लगाने में जुट गई है। लखनऊ पुलिस ने पिछले साल जून में वाहन चोर गिरोह के कानपुर निवासी सतपाल सिंह और मनोज कुमार उर्फ बऊआ को गिरफ्तार किया था।

इनसे मिले सुराग से जुलाई में पुलिस ने कानपुर के ही एनुलहक, जियाऊलहक, विकास जयसवाल, इसरार और विनोद शर्मा को गिरफ्तार कर इनके कब्जे से चोरी की 62 लग्जरी गाड़ियां बरामद की थी। छानबीन में सामने आया था कि इन आरोपियों की कानपुर में ऑटो पार्ट की दुकानें हैं।

चोरी की गाड़ियों का चेचिस नंबर बदलने से लेकर उन्हें मॉडीफाई इन्हीं दुकानों पर किया जाता है। इसके बाद पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए कुल 114 चोरी के वाहन बरामद किए। इनमें ज्यादातर गाड़ियां खुद मालिकों ने गिरोह के हाथों बेचकर इंश्योरेंस कंपनियों से क्लेम लिया था।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि इटावा पुलिस को भी कानपुर से सुराग मिलने के बाद दलालों को दबोचकर 41 वाहन बरामद करने में कामयाबी मिली। पुलिस पहले पकड़े जा चुके शातिरों से जेल जाकर पूछताछ करने वाली है।
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नेपाल के बाद नक्सल प्रभावित प्रदेश बन रहे अड्डा
पुलिस का कहना है कि लंबे समय तक चोरी के वाहन नेपाल में दिलशाद मिर्जा बेग के ठिकाने पर बिकते रहे। मिर्जा की मौत के कई साल बाद उसके एक रिश्तेदार ने फिर से धंधा खड़ा करने का प्रयास किया, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिर्जा की तरह पैर जमाने में फेल रहा।

इसलिए वाहन चोर गिरोह ने नया तरीका ढूढ़ा। अब नगालैंड, मणिपुर और छत्तीसगढ़ समेत आदिवासियों के नक्सल प्रभावित प्रदेशों में चोरी के वाहनों को एक नंबर बनाने का खेल चल रहा है। पुलिस का प्रभाव यहां कम होने की वजह से आरटीओ विभाग आसानी से चोरी के गाड़ियों का पंजीकरण कर रहा है।

इस कार्रवाई के बाद पुलिस अब इन प्रदेशों में फैले सिंडिकेट को भी तोड़ने की जुगत में लगा रही है। एसएसपी आकाश तोमर का कहना है कि वाहन चोरी के इस देशव्यापी रैकेट को खत्म करने के लिए हर एजेंसी की मदद ली जा रही है।

एडीजी ने टीम को दिया एक लाख का पुरस्कार
गैंग का भंडाफोड़ करके 41 वाहन बरामद करने वाली टीम में एसओजी प्रभारी सत्येंद्र यादव, इंस्पेक्टर अंजन कुमार सिंह, जितेंद्र प्रताप सिंह, जीवाराम यादव, अनिल कुमार और नवरत्न गौतम ने अहम भूमिका निभाई है। एडीजी कानपुर जय नरायण सिंह ने इस टीम को एक लाख रुपये पुस्कार देने की घोषणा की है।
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