चित्रकूट में शरद पूर्णिमा के दिन देश भर से आए दमा रोगियों की भीड़ जुटती है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा पर पूरा चांद देखने से उनका रोग ठीक हो जाता है। इस रोग से पीड़ित मरीजों को मठ मंदिरों में चांद की रोशनी में रखी गई खीर भी खिलाई जाती है, जो उनके लिए अमृत का काम करती है।
शरद पूर्णिमा के दिन चित्रकूट में धर्मनगरी के रामघाट पर परिक्रमा मार्ग से लेकर कई मंदिरों के बाहर श्रद्धालु पत्तल में खीर रखकर बैठे नजर आते है। इनका कहना है, चंद्रमा के रोशनी में खीर रख सुबह खाने से वह शरीर के लिए अमृत का कार्य करती है।
इनके अलावा 16 कलाओें से पूर्ण चंद्रमा को देखने के लिए आधी रात तक लाखों श्रद्धालु रामघाट पर डटे रहते हैं। वही मंठ मंदिरों में भजन कीर्तन गूंजते रहते हैं। रामघाट से लेकर परिक्रमा मार्ग तक रातभर श्रद्धालुओं की टोली अमृत पाने की आस में डटी रहती है। इस पर्व में आए श्रद्धालु गुलाबी ठंड से बचने के लिए जगह-जगह अलाव जलाते है।
खीर बनाने के लिए एक दिन में धर्मनगरी में हजारों लीटर दूध बिकने से दूध के भाव बढ़ जाते हैं। जिससे दूधवालों की शदर पूर्णमा को चांदी हो जाती है। आमतौर पर 30 रूपए लीटर वाला दूध दुकानदारों ने 60 रूपए लीटर तक बेचा।