सनातन संस्कृति में नागपंचमी का पर्व प्रकृति, जीव-जंतुओं और विशेषकर नाग देवता की आराधना का प्रतीक माना जाता है। इस पावन अवसर पर जहाँ एक ओर लोग मंदिरों में जाकर नाग देवता की पूजा-अर्चना कर रहे हैं और दूध अर्पित कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे असल जीवन के नायक भी हैं जो सिर्फ औपचारिकता निभाने के बजाय धरातल पर नागों और अन्य वन्य जीवों की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं।
किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले मनोज का अनूठा संकल्प
साधारण किसान परिवार में जन्मे मनोज कुमार बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों में खेतों, घरों और रास्तों पर सांपों का निकलना आम बात है। अक्सर जानकारी के अभाव में लोग डर के मारे इन बेजुबान जीवों को पीट-पीटकर मार डालते हैं। कई बार लोग सांप के काटने से घबराकर अपनी या दूसरों की जान जोखिम में डाल लेते हैं।
7 साल का सफर और अनगिनत खतरनाक रेस्क्यू
पिछले सात वर्षों की अपनी इस लंबी और जोखिम भरी यात्रा के दौरान मनोज ने एक से बढ़कर एक जहरीले और खतरनाक सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू किया है। उनके मुताबिक, उन्होंने अपने इस कार्यकाल में कोबरा (नाग), करत, वाइपर और रसेल वाइपर जैसे बेहद जहरीले सांपों को आबादी वाले इलाकों से सुरक्षित पकड़ा है।
बिना किसी शुल्क के चौबीस घंटे सेवा के लिए तैयार
मनोज कुमार की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे इस नेक और खतरनाक कार्य के लिए किसी से भी एक रुपया शुल्क नहीं लेते। दिन हो या रात, बारिश का मौसम हो या भीषण गर्मी, जैसे ही उन्हें किसी ग्रामीण या शहरवासी का फोन आता है कि उनके घर या खेत में सांप निकला है, मनोज तुरंत अपनी बाइक या साइकिल उठाकर मौके पर पहुंच जाते हैं। दूर-दराज के गांवों से भी लोग उन्हें फोन करके मदद मांगते हैं और वे बिना किसी देरी के पहुंच जाते हैं। उनके इस निस्वार्थ सेवा भाव के कारण आज वह क्षेत्र के बच्चे-बच्चे की जुबान पर 'सर्प मित्र' के रूप में जाने जाते हैं।
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का मिलता है भरपूर सम्मान
शुरुआत में जब मनोज ने सांपों को पकड़ना शुरू किया था, तो उनके परिवार वाले भी उनकी सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित रहते थे। लेकिन धीरे-धीरे जब लोगों की जान बचने लगी और उन्होंने बेजुबानों के प्रति मनोज का समर्पण देखा, तो ग्रामीण भी उनका सम्मान करने लगे।