नौकरी लगवाने के नाम पर लिया आधार और पैन कार्ड
इन युवकों का आरोप है कि कोतवाली क्षेत्र के ही पूरा गांव निवासी सगे भाइयों सूरज और नीरज ने नौकरी लगवाने के नाम पर अक्टूबर में पैन और आधार कार्ड लिए थे। अमर उजाला की पड़ताल में पता चला है कि फर्जीवाड़े की जांच हरियाणा के रोहतक और हिसार के बीच स्थित महम रेलवे पुलिस थाने से हो रही है। फर्जीवाड़े का पता तब चला जब पुलिस ने 12 जनवरी को रेलवे थाने में दर्ज रेल संपत्ति के चोरी के एक मामले की विवेचना की।
फर्जी फर्मां के जरिए बेचा चोरी का स्क्रैप
हरियाणा में रोहतक और हिसार के बीच नई रेल लाइन बिछाई जा रही है। इसी दौरान यहां से चार करोड़ रुपये का रेलवे का स्क्रैप चोरी कर लिया गया। इसकी रिपोर्ट रेल अफसरों ने रेलवे पुलिस के महम थाने में दर्ज कराई। जब इसकी विवेचना शुरू की गई, तो पुलिस ने हरियाणा के गोहाना निवासी पुनीत को गिरफ्तार किया। रेलवे स्क्रैप चोरी करने वाले गैंग का लीडर पुनीत ही है। पूछताछ में पुलिस ने पुनीत से स्क्रैप के बारे में जानकारी ली, तो पता चला कि उसने स्क्रैप अलग अलग कंपनियों के जरिए पंजाब के एक शहर में बेच दिया।
कंपनियों की छानबीन में फर्जी दस्तावेजों का खुलासा
जब कंपनियों की छानबीन हुई, तो पता चला कि जिन लोगों के अभिलेख लगे हैं, उन पतों पर संबंधित लोग रहते ही नहीं हैं। मौके पर जाने पर पुलिस को उक्त कंपनियां भी नहीं मिलीं। जब पुलिस ने कंपनी खोले जाने और लेनदेन में इस्तेमाल किए गए अभिलेखों को खंगाला, तो हरदोई जिले के कछौना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत अलग अलग गांवों के लगभग 35 लोगों के नाम सामने आए। इन सभी के नाम पर फर्जी कंपनी बनाकर न सिर्फ चोरी का माल खपाया गया बल्कि करोड़ों रुपये की जीएसटी की चोरी भी की गई।
रोहतक की विवेचना में सरकारी गवाह बन चुके हैं कछौना के तीन युवक
अमर उजाला की पड़ताल में पता चला कि कछौना कोतवाली क्षेत्र के बसंतपुर मजरा दीननगर निवासी मोहम्मद साहिल समेत तीन युवक फर्जीवाड़े, जीएसटी चोरी और रेल संपत्ति की चोरी के मामले में सरकारी गवाह बन चुके हैं। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि संदीप वर्मा और पीटर उर्फ अंकित भी सरकारी गवाह बन चुके है। चूंकि अभी मामले में विवेचना जारी है इसलिए पुलिस को उम्मीद है कि अभी फर्जी वाड़े के शिकार हुए कई और लोग सरकारी गवाह बनेंगे। चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी कई खेल खुलेंगे।
आधार कार्ड में जालसाजों ने बदलवा दिया पता
किसी भी फर्म का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए पैनकार्ड और आधार कार्ड जरूरी होते हैं। गोहाना के पुनीत ने नौकरी का लालच देकर युवाओं के अभिलेख ले लिए। इन अभिलेखों के साथ भी छेड़छाड़ की गई। फर्जीवाड़ा का शिकर हुए अधिकांश युवाओं के आधार कार्ड में पता बदलवा दिया गया। ज्यादातर युवकों के आधार कार्ड में संशोधित पता दिल्ली का रोहिणी इलाका दर्शाया गया है। फर्जीवाड़ा कर जितनी भी फर्में हरदोई के युवाओं के अभिलेखों के इस्तेमाल से बनाई गईं उन सभी को रोहिणी इलाके के अलग अलग हिस्सों में स्थापित दिखाया गया।
सारी फर्में कर रहीं स्क्रैप का ही काम
फर्जीवाड़ा करने के लिए जो फर्में बनाई गईं वह सब स्क्रैप का ही काम करती हैं। स्थानीय युवकों के अभिलेखों का इस्तेमाल कर राठौर ट्रेडर्स, याकूब ट्रेडिंग कंपनी, राठौर इंटर प्राइजेज आदि स्क्रैप का ही काम कर रही हैं। इनमें याकूब ट्रेडिंग कंपनी में मोहम्मद साहिल के अभिलेख लगे हैं। साहिल के मुताबिक उसके अभिलेखों पर लगभग चालीस करोड़ रुपये का टर्न ओवर दिख रहा था।
पुलिस को है दो सगे भाइयों समेत तीन की तलाश
रोहतक जिले के महम आरपीएफ थाने की पुलिस को कछौना कोतवाली क्षेत्र के पूरा गांव निवासी सूरज और नीरज के साथ ही मुदित उर्फ सचिन साहू की भी तलाश है। पूरे मामले की विवेचना कर रहे निरीक्षक सेवा सिंह ज्यादा कुछ नहीं बताते, लेकिन इसकी तस्दीक करते हैं कि सूरज, नीरज और मुदित की तलाश है। इनका एक साथी आशीष इसी मामले में जेल भेजा जा चुका है।
बिना बैंक कर्मियों की मिली भगत के संभव नहीं फर्जीवाड़ा
नाम न छापने के अनुरोध पर बैंक और टैक्स के जानकार कहते है कि बैंक कर्मियों की मिलीभगत के बिना यह फर्जीवाड़ा संभव नहीं है। दरअसल अमर उजाला की पड़ताल में पता चला कि अमन राठौर के नाम पर जो फर्म खोली गई उसका बैंक खाता दो अलग अलग बैंकों में है। इन बैंकों में अमन गया ही नहीं, लेकिन उसकी तस्वीर और अभिलेख का इस्तेमाल कर खाता खुल गया।
बायोमीट्रिक बेस्ड होगा फर्म का पंजीकरण
वाणिज्यकर विभाग के सहायक उपायुक्त वीर सिंह बताते हैं कि पूरे देश में स्टेट और सेंट्रल जीएसटी की टीमों ने फर्जी फर्मां को पकड़ने की कार्रवाई की है। दोषियों पर कार्रवाई भी हुई है। देखने में आया है कि फर्जीवाड़ा करने वाले लोग आधार कार्ड में न सिर्फ नाम बल्कि मोबाइल नंबर भी बदलवा देते है। ऐसे में ओटीपी आधारित पंजीकरण आसानी से हो जाता है। अब देश में बायोमीट्रिक आधारित पंजीकरण की व्यवस्था की जा रही है। इसके पायलट प्रोजेक्ट की शुरूआत गुजरात से हो चुकी है। जल्द ही पूरे देश में लागू होने की संभावना है।
हर एक करोड़ करोड़ रुपये पर 18 लाख की चपत
शहर के प्रतिष्ठित सीए कार्तिकेय गुप्ता कहते हैं कि स्क्रैप के कारोबार में 18 फीसदी जीएसटी है। यानी अगर फर्जी कंपनी बनाकर एक करोड़ रुपये का कारोबार किया गया, तो 18 लाख रुपये की चपत सरकार को लगती है और यह चपत फर्जीवाड़ा करने वाले की जेब में जाती है। कार्तिकेय गुप्ता कहते हैं कि किसी को भी पैनकार्ड और आधारकार्ड देते समय स्पष्ट तौर पर यह लिखा जाना चाहिए कि किस उपयोग के लिए दिया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर अगर कछौना के युवकों ने नौकरी के लिए अभिलेख दिए थे, तो उन पर लिख देना चाहिए थाकि नौकरी के आवेदन हेतु। ऐसा होता तो शायद इनके अभिलेखों का दुरुपयोग न होता।