लखनऊ में विदेशी मुद्रा के साथ पकड़े गए कानपुर के अनवरगंज के दलेलपुरवा निवासी सलाउद्दीन के पुलिस की पकड़ से छूटने के बाद हवाला कारोबार फिर लोगों की निगाह में आ गया है। खुफिया विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक शहर के थोक बाजारों में बड़े पैमाने पर हवाला कारोबार चल रहा है। बस तरीका बदल गया है।
अब किसी एक जगह बैठकर भारी मात्रा में रुपये इकट्ठा करने के बजाय एजेंट बना दिए गए हैं। वे फोन पर मिले निर्देशों के बाद तय जगह से रुपये लेते और पहुंचाते हैं। इसमें वह इंटरनेट कॉल का इस्तेमाल करते हैं। एसटीएफ समेत अन्य केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर शहर के बड़े कारोबारी हैं। सूत्रों की माने तो लोकसभा चुनाव के पहले बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
प्रतीकात्मक फोटो
यहां भी वही चल रहा था खेल
एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक सलाउद्दीन और शावेज सहित गिरोह के सभी हवाला कारोबारियों के लिए काम करते हैं। साथ ही वह खुद भी हवाला का काम करते हैं। ये पूरा काम फोन कॉल पर ही होता है। इसमें खासकर वे इंटरनेट कॉल का इस्तेमाल करते हैं। ऐसा वे पुलिस की गिरफ्त में आने से बचने के लिए करते हैं। फोन पर जो निर्देश मिलते हैं, उसी आधार पर वह पैसे को देश से लेकर विदेश तक पहुंचाते हैं। वहीं कभी-कभी विदेश से कीमती सामान भी लेकर आते हैं।
इसमें जुड़े थे हवाला कारोबार से तार
पिछले तीन-चार साल में बिरहाना रोड और नयागंज क्षेत्र में हवाला कारोबारियों के साथ लूटपाट के कुछ मामले सामने आए थे। इनमें एक प्रसिद्ध स्कूल के ऊपर रह रहे एक हवाला कारोबारी के फ्लैट से लाखों रुपये लेकर कुछ पुलिसकर्मी भागे थे। फीलखाना थाने की पुलिस ने फूलबाग से आरोपी पुलिसकर्मियों को पकड़ लिया था। हालांकि बाद में इस मामले को रफा-दफा कर दिया गया था। ये मामला 2016 का है। इसकेकुछ ही दिन बाद पटकापुर क्षेत्र के एक नामी हवाला कारोबारी के स्कूटर की डिगी से लाखों रुपये चोरी हो गए थे। इन सभी मामलों की जांच का रुख हवाला कारोबार की तरफ ही थी।
डेमो पिक
यहां हो सकता था बड़ा खुलासा
दो महीने पहले ही नयागंज की एक मार्केट में हवाला कारोबारी के यहां हजारों की लूट हुई थी। सूत्रों के मुताबिक उसके दफ्तर में घटना से पहले करोड़ों रुपये हटाए गए थे। पुलिस की जांच इसका खुलासा हुआ था। सीओ कलक्टरगंज की जांच में हवाला कारोबार सामने आया था।
इन पर है पैनी नजर
हवाला कारोबार पर बारीक नजर रखने वालों का कहना है कि सुपारी और पान मसाले के व्यापार में बड़े पैमाने पर हवाला कारोबार होता है। जीएसटी चोरी के माल का भुगतान तय ठिकानों पर नकद ही किया जाता है। इसके अलावा किराने, कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक्स के कारोबार में भी हवाले को रुपयों के लेन-देन का सबसे विश्वसनीय साधन माना जाता है।