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गड़बड़झाला लग गया ‘आर्यभट्ट’ पर ताला

Wed, 24 Dec 2014 02:09 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
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जिस वक्त फिक्स डिपॉजिट की ब्याज दर साढ़े आठ फीसदी से ऊपर चल रही हो, उस दौरान यदि कोई कंपनी पांच फीसदी सालाना ब्याज पर लोन का ऑफर दे तो कोई भी समझ जाएगा कि मामला गड़बड़ है।
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मगर तमाम लोग अधिक मुनाफे के लालच में जान-बूझकर ऐसी कंपनियों के झांसे में फंस जाते हैं। कानपुर और आसपास के करीब पांच सौ से ज्यादा लोगों के साथ ऐसी ही ठगी हुई है।

प्रोसेसिंग फीस के नाम पर लाखों रुपये लेकर कंपनी लापता हो गई है। उसके दफ्तर में ताला बंद है और सभी फोन नंबर स्विच ऑफ हैं।

सिविल लाइंस में मैकरॉबर्ट अस्पताल के सामने गली में करीब तीन माह पूर्व आर्यभट्ट फाइनेंस (एजीबी फिनकॉर्प सर्विसेज प्रा. लि.) कंपनी का दफ्तर खोला गया था।
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कंपनी की ओर से मात्र पांच फीसदी सालाना दर पर लोन देने का प्रचार शुरू किया गया। इस पर तमाम लोगों ने कार्यालय में संपर्क करना शुरू किया। लोगों को बताया गया कि कंपनी रिजर्व बैंक से लोन देने के लिए अधिकृत हैं।

इस बाबत तमाम प्रमाण भी दिखाए। यह भी बताया कि उन्हें गारंटी के लिए बहुत औपचारिकताएं नहीं चाहिए। झांसे में आए लोगों ने आवेदन करना शुरू किया।

इन्हीं में एक बर्रा निवासी धर्मेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने दस लाख रुपये के पर्सनल लोन का आवेदन किया। कंपनी ने प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 29102 रुपये का ड्राफ्ट और करीब 11000 रुपये नगद जमा कराए।

दो दिसंबर को लोन पास होने संबंधी पत्र थमाते हुए आश्वासन दिया गया कि बीस दिन में वे चेक उठा लें। दस साल की अवधि के लिए लोन की मासिक किस्त 8334 रुपये होगी।

20 दिसंबर को जब उन्होंने यहां आकर देखा तो कंपनी के दफ्तर में ताला बंद था। कंपनी के निदेशक कपिल शर्मा के मोबाइल और ऑफिस के नंबरों पर फोन किया तो वे स्विच ऑफ निकले।

कुछ इसी तरह घंटाघर के रहने वाले रामकरन से 25 हजार, उन्नाव के अजय तिवारी से 28 हजार और त्रिभुवन पाल से 19500 रुपये प्रोसेसिंग फीस जमा करवाई गई। कंपनी के दफ्तर में ताला देख लोगों ने यहां हंगामा भी किया।

आसपास के दफ्तरों में काम करने वालों ने बताया कि यहां करीब पांच कर्मचारियों का स्टाफ था, जो कार्यालय बंद होने के बाद से लापता है। कंपनी में कानपुर और आसपास के जिलों के लगभग पांच सौ से ज्यादा लोगों ने प्रोसेसिंग फीस जमा की थी।

यूपीएसआईडीसी ः ड्राफ्टमैन को बर्खास्तगी का नोटिस

यूनीमैक्स नाम की कंपनी में बतौर निदेशक रहे यूपीएसआईडीसी के एक ड्राफ्टमैन को बर्खास्तगी का नोटिस थमाया गया है। उसे पंद्रह दिन में अपना स्पष्टीकरण देना है, इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

उधर, भर्ती घोटाले में कार्रवाई करते हुए एक अन्य कर्मचारी को भी जल्द अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।ऑनलाइन नेटवर्क बनाने वाली कंपनी यूनीमैक्स के खिलाफ लखनऊ के कृष्णानगर, सरोजनीनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।

कंपनी के निदेशकों पर लोगों के करीब दो सौ करोड़ रुपये हड़पने का आरोप है। इसमें यूपीसएसआईडीसी में ड्राफ्टमैन पद पर कार्यरत अजय कुमार भारती का नाम बतौर निदेशक शामिल था।

मामले की जांच कर रहे पुलिस के विशेष अनुसंधान दल ने ड्राफ्टमैन को दोषी पाया है। इसकी रिपोर्ट यूपीएसआईडीसी को भेजी गई।

इस आधार पर अजय भारती को निलंबित करके झांसी कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया। इधर अजय पुलिस से बचने के लिए गायब है।

तमाम नोटिसों का जवाब नहीं देने पर उसे बर्खास्त किए जाने संबंधी नोटिस प्रबंध निदेशक ने जारी किया है। उधर भर्ती घोटाले में कार्रवाई करते हुए एक अन्य कर्मचारी सुधीर को भी बर्खास्तगी का नोटिस दिया गया है।
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