उसमें फेफड़ों में कमजोरी आने का खुलासा हुआ है। नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजीशियन इंडिया के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एसके कटियार का कहना है कि संक्रमण के लेवल के लिहाज से संक्रमितों के फेफड़ों में कमजोरी आई है। जिनके संक्रमण का लोड अधिक था, उनके 40 फीसदी तक नुकसान हुआ है।
पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट में यह नई बात सामने आ रही है। सीनियर चेस्ट फिजीशियन डॉ. राजीव कक्कड़ का कहना है कि कोरोना के सबसे अधिक असर फेफड़ों पर है। एक तो माहौल में प्रदूषण अधिक है, उस पर कोरोना ने फेफड़ों को और कमजोर किया है।
फेफड़ों में एक बार फाइब्रोसिस होने के बाद उसके फिर ठीक होने की उम्मीद बहुत कम होती है। लेकिन कोरोना के रोगियों में यह देखा गया है कि भरपूर इलाज लेने पर फाइब्रोसिस रिवर्ट हो जा रही है। - डॉ. एसके कटियार, पूर्व अध्यक्ष नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजीशियन इंडिया