बांदा जिले की शहर कोतवाली पुलिस ने एक ऐसे शातिर और हाईटेक अंतरजनपदीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो खुद को आरटीओ, एसडीएम और खनन अधिकारी बताकर वाहन चालकों से खुलेआम अवैध वसूली और रंगदारी की वारदातों को अंजाम दे रहा था। एक जागरूक ई-रिक्शा चालक की सटीक सूचना पर पुलिस ने मवई बाईपास पर घेराबंदी करके गिरोह के चार सदस्यों को रंगे हाथों दबोच लिया। इनके कब्जे से वसूली में इस्तेमाल होने वाली कार, लैपटॉप, मोबाइल, फर्जी सरकारी दस्तावेज और नकदी बरामद हुई है।
ई-रिक्शा चालक की सूझबूझ से खुली 'फर्जी अफसरों' की पोल
जानकारी के मुताबिक, बांदा के पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल के निर्देशन में जिले भर में अपराधियों के खिलाफ सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। शुक्रवार को जब शहर कोतवाली पुलिस मवई बाईपास के पास गश्त और संदिग्ध वाहनों की चेकिंग कर रही थी, तभी एक ई-रिक्शा चालक हांफता हुआ पुलिसकर्मियों के पास पहुंचा।
डरा-धमका कर करते थे वसूली, लैपटॉप से बनाते थे फर्जी चालान
कोतवाली लाकर जब पुलिस ने चारों आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की, तो उनके कबूलनामे ने पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। आरोपियों ने बताया कि वे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों में अपना जाल फैलाए हुए थे। ये लोग अक्सर सुनसान रास्तों या हाईवे के किनारे खड़े होकर ई-रिक्शा, डंपर, ट्रक और ओवरलोड वाहनों को अपना निशाना बनाते थे।
इनका काम करने का तरीका बेहद शातिर था, जैसे ही कोई गाड़ी रुकती, आरोपी खुद को आरटीओ, एसडीएम या माइंस अफसर बताकर धौंस जमाते थे। ये मोबाइल से गाड़ी और चालक की फोटो खींचते थे और लैपटॉप के जरिए फर्जी चालान या गाड़ी सीज करने का डर दिखाते थे। कानूनी कार्रवाई और भारी-भरकम जुर्माने से बचने के लिए लाचार वाहन चालक इन्हें जो भी रकम देते, ये लेकर रफूचक्कर हो जाते और आपस में बराबर बांट लेते थे।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर 5,400 रुपये नकद, घटना में प्रयुक्त कार, एक लैपटॉप, चार मोबाइल फोन और विभिन्न दस्तावेजों से भरी फाइल बरामद की है। मामले में बीएनएस की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। गिरफ्तार आरोपियों में मध्य प्रदेश के रीवा निवासी सौरभ तथा चित्रकूट जिले के कमल, राजकुमार और संतोष कुमार शामिल हैं।