कानपुर में निकली क्रांतिकारियों की सुरंग
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ब्रिटिश जमाने के सिविल हॉस्पिटल से कानपुर का जिला अस्पताल बने उर्सला में खुदाई के दौरान गहरी सुरंग मिली है। सुरंग कितनी लंबी है?, कहां तक जाती है? नीचे नजर आ रहा दरवाजा कैसे खुलेगा? इसकी जांच पुरातत्व विभाग करेगा। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने खुदाई का काम रुकवा दिया है।
उर्सला ओल्ड बिल्डिंग परिसर में नगर निगम ने सड़क बनवाने के लिए मेनगेट के अंदर रैनबसेरा के पास जेसीवी से खुदाई शुरू कराई। खुदाई के दौरान वहां पड़ा पत्थर और मलबा हटाते ही नीचे करीब 20 फीट गहरा गड्ढा नजर आया। वहां काम करा रहे नगर निगम के सुपरवाइजर मनोज कुमार ने बताया कि सुरंग में नीचे उतरने के लिए सपोर्टर लगे थे। अंदर पुराने ईंटों ने बना रास्ता और एक दरवाजा नजर आ रहा था। काम रुकवाकर अफसरों को सूचना दी। उर्सला के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजीव कुमार सहित अन्य डॉक्टर, कर्मचारी और तीमारदारों सहित तमाम लोग वहां सुरंग देखने पहुंचे। इससे वहां भीड़ लग गई। कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने लोगों को हटाया। इसी बीच नगर निगम कर्मचारी गड्ढे में मलवा डलवाने लगे तो मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। कुछ लोगों ने अंदर जाकर पड़ताल करने के लिए कहा तो अस्पताल प्रशासन ने अंदर अंधेरा और जहरीली गैस होने की आशंका के मद्देनजर उन्हें ऐसा करने से रोक दिया।
उर्सला के अवर अभियंता जेपी सक्सेना का मानना है कि अंग्रेजों के जमाने में वहां नाला रहा होगा और गंगा की तरफ से बाढ़ के पानी को रोकने के लिए फाटक लगा होगा। जबकि इस अस्पताल के पुराने कर्मचारियों का कहना है कि पहले वहां कुंआ था, जो बाद में पाट दिया गया था।
सुरंग ऊपर से कुंए की तरह चौड़ी नजर आ रही
उर्सला के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि सुरंग ऊपर से कुंए की तरह चौड़ी नजर आ रही है। उसमें नीचे उतरने के लिए सपोर्टर लगे हैं। नीचे सुरंग परेड की तरफ मुड़ी है और उस तरफ एक दरवाजा सा नजर आ रहा है। फिलहाल खुदाई रुकवा दी गई है। इसके ऊपर सीमेंट की पटिया रखाने के निर्देश दिए हैं, ताकि पुरातत्व विभाग जांच करना चाहे तो पटिया हटाकर कर सके।