फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पूर्व बसपा नेता हत्याकांड: पूर्वांचल के बाहुबली के रिश्तेदार का नाम एफआईआर से बाहर, लेनदेन की चर्चा

Sun, 04 Oct 2020 10:10 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
बसपा नेता पिंटू सेंगर हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
कानपुर के चकेरी में 20 जून को हुई हिस्ट्रीशीटर पिंटू सेंगर की हत्या में पुलिस ने मुख्य आरोपी साउद अख्तर के भाई महफूज अख्तर का नाम एफआईआर से बाहर कर दिया है। ऐसा उसकी ही टेनरी के कर्मचारियों के बयान के आधार पर किया गया। पुलिस का दावा है कि उसके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। दोनों भाई पूर्वांचल के एक बाहुबली के रिश्तेदार हैं। वहीं नामजद दोनों वकीलों को भी क्लीनचिट दे दी है। 
विज्ञापन


मामले में पिंटू के भाई ने प्रापर्टी विवाद में मनोज गुप्ता, पप्पू स्मार्ट, साउद अख्तर, महफूज अख्तर और वकीलों दीनू उपाध्याय व अरिदमन सिंह पर हत्या कराए जाने का आरोप लगाकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप है कि पुलिस ने साउद को भी बचाने का भरसक प्रयास किया लेकिन मुख्य आरोपी होने के चलते उसे बचा नहीं सकी। कोर्ट में दाखिल की गई चार्जशीट में बताया गया है कि महफूज के खिलाफ साक्ष्य नहीं मिले हैं। वकीलों का नाम हटाने में भी यही तर्क दिया गया है। 
 
विज्ञापन

बसपा नेता पिंटू सेंगर हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
24वें पर्चे में बाहर किया नाम 
पुलिस ने 24वें पर्चे में महफूज का नाम बाहर किया है। महफूज की टेनरी के चार मजदूरों के बयान लिए है। इसमें कर्मचारियोें ने कहा है कि वारदात के वक्त महफूज टेनरी में थे। हैरानी की बात ये है कि हत्या के अलावा साजिश रचने का भी आरोप था। इसे भी पुलिस ने खारिज कर दिया।

दो और आरोपियों को जेल भेजने के बाद बताया निर्दोष, कोर्ट ने फटकारा
आरोप था कि मनोज ने ही पप्पू स्मार्ट व साउद अख्तर को सुपारी देकर पिंटू की हत्या करवाई। पुलिस ने मनोज व एक अन्य आरोपी वीरेंद्र पाल को जेल भी भेजा। मामला शांत होने के बाद पुलिस ने कोर्ट में 169 की कार्रवाई के तहत दोनों को जेल से रिहा कराने को लेकर रिपोर्ट दाखिल की। इसमें दावा किया कि ये लोग निर्दोष हैं। हालांकि कोर्ट ने साक्ष्यों का जिक्र कर रिपोर्ट को निरस्त कर दिया और फटकार भी लगाई। 

लेनदेन की भी रही चर्चा
नाम हटाने से लेकर मनोज व वीरेंद्र को निर्दोष बताने की प्रक्रिया तत्कालीन चकेरी इंस्पेक्टर राम कुमार गुप्ता ने पूरी की थी। सूत्रों के मुताबिक कई दिनों तक थाने में बैठाकर मनोज से पूछताछ हुई थी। इसको लेकर लेनदेन की भी चर्चा शुरू होती रही।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें