कानपुर किडनी कांड की एसआईटी जांच में एक विदेशी एजेंट का नाम भी सामने आया है। इस एजेंट के माध्यम से विदेशों से गरीबों को जाल में फंसाकर भारत लाया जाता था। उनकी किडनी और लिवर दूसरे मरीजों को ट्रांसप्लाट कराए जाते थे। अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब में डोनर के ब्लड सैंपल बदलकर डीएनए मैच करा दिया जाता था।
एसआईटी की जांच में आया है कि पीएसआरआई के कर्मचारी बिचौलियों के जरिए किडनी व लिवर बेचने और खरीदने वालों के फर्जी दस्तावेज तैयार कराते थे। दस्तावेजों में डोनर व किडनी या लिवर लेने वालों के बीच सगे रिश्ते दिखाए जाते थे। बाद में पैथोलॉजी या अस्पताल में ब्लड सैंपल बदल कर डोनर और मरीज के डीएनए मैच करा दिए जाते थे।
इन्हीं सब दस्तावेजों के आधार पर डॉ. शुक्ला की नेतृत्व वाली सात सदस्यीय प्राधिकार समिति किडनी या लीवर ट्रांसप्लांट को हरी झंडी दे देती थी। जांच टीम के एक अफसर के मुताबिक विदेशी एजेंट और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद कई और नामचीन अस्पतालों व डॉक्टरों के नाम सामने आने की उम्मीद है।