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Kanpur News: 60 साल में पहली बार स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े पदक मेधावियों को नहीं मिलेंगे

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कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के 41 वें दीक्षांत समारोह में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े एक भी पदक मेधावियों को नहीं दिए जाएंगे। ऐसा 60 वर्षों में पहली बार होगा। यह व्यवस्था 2020 में मेडिकल कॉलेजों की संबद्धता को विश्वविद्यालय से समाप्त करने के कारण हो रही है।
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प्रदेश सरकार की नई नीति के तहत सीएसजेएमयू से जुड़े सभी मेडिकल कॉलेजों को लखनऊ की अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी से संबद्ध कर दिया गया है। नौ जुलाई का होने वाले दीक्षांत में पदक प्राप्तकर्ताओं की सूची जारी की जा रही है। पिछले दीक्षांत तक मेडिकल छात्रों को कुलपति स्वर्ण पदक समेत चार पदकों से सम्मानित किया गया। वर्ष 2020 में मेडिकल कॉलेजों की संबद्धता समाप्त करने से नियमित कोर्स के छात्रों की डिग्री वर्ष 2025 में पूरी हो गई है।

अब जो छात्र बचे हैं, वह बैक या एक्स पेपर दे रहे हैं। दीक्षांत में पदक नियमित छात्र को ही मिलते हैं। विवि के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों की संबद्धता समाप्त कर अन्य विवि से जोड़ा गया है। अब मेडिकल कॉलेजों को पदक अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी से मिलेगा।
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स्वास्थ्य क्षेत्र में मिलते थे पदक
चिकित्सा संकाय में सर्वश्रेष्ठ छात्र के लिए कुलपति स्वर्ण पदक मिलता था। एमबीबीएस में अधिकतम अंक प्राप्तकर्ता को लाला लक्ष्मीपत सिंघानिया स्वर्ण पदक दिया जाता था, मेडिकल साइंस संकाय में सर्वश्रेष्ठ छात्रा को श्रीरामचंद्र मुसद्दी स्वर्ण पदक और एमबीबीएस फाइनल परीक्षा में जीएसवीएम में प्रथम प्रयत्न में सर्वोच्च अंक पाने पर मिलने वाला डॉ. बीएन भल्ला स्वर्ण पदक से सम्मानित किया जाता था।
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