चकरनगर। कस्बा क्षेत्र के ककरैया गांव का 12 वर्षीय मदन अपने हौसले से सभी को प्रेरणा दे रहा है। मदन का परिवार भूमि हीन है। पिता सुनील बटाई पर खेती लेकर परिवार चलाते हैं। इस बार भी उन्होंने बटाई पर खेत लिया था लेकिन यमुना और चंबल नदी में आई बाढ़ से इस बार फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। ऐसे में पूरे परिवार का बोझ दोनों भाईयों के कंधों पर आ गया है। ऐसे में भी मदन ने हिम्मत नहीं हारी है। मदन के अनुसार बाढ़ से फसल डूबने पर पिता ने जब उससे इस वर्ष सरकारी स्कूल में पढ़ने को कहा तो उसने स्वयं फीस का पैसा जुटाने की ठानी और एक ठेला किराए पर लेकर वह भी लगाने लगा। वह सुबह चार बजे उठकर पढ़ाई करता है और इसके बाद चकरनगर के एक निजी अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पढ़ने जाता है। छुट्टी के बाद वह गांव की सड़क पर फिंगर और मोमोज का ठेला लगाकर अपने पढ़ाई का खर्च स्वयं जुटाता है। मदन का परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। उसके पिता सुनील निषाद मजदूरी करते हैं, जबकि उसका बड़ा भाई भी फास्ट फूड का ठेला लगाकर परिवार का भरण-पोषण करता है। मदन यह साबित कर रहा है कि इच्छाशक्ति हो तो विपरीत परिस्थितियां भी रोड़ा नहीं बनती हैं। संवाद