कानपुर देहात के रुरा स्टेशन के पास 28 दिसंबर को सियालदह-अजमेर एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने से पहले चटकी पटरी से पांच मालगाड़ियां गुजर चुकी थीं। जीआरपी की रेलवे कर्मचारियों से शुक्रवार को हुई पूछताछ में खुलासा हुआ है कि सिग्नल में चटकी पटरी का अलर्ट होने के बावजूद स्टेशन मास्टर ने हरी झंडी दिखाकर मालगाड़ियों को रवाना किया था। यही स्टेशन मास्टर के निलंबन की वजह बनी। इस दुर्घटना के बाद जीआरपी ने अज्ञात रेलवे कर्मचारियों के खिलाफ लापरवाही का मुकदमा दर्ज किया था।
सिग्नल विभाग के इंजीनियर कैलाशचंद्र और प्रेमशंकर से हुई जीआरपी इंस्पेक्टर सतीश गौतम की पूछताछ में बताया गया कि पटरी चटकी होने का अलर्ट रेड सिग्नल हो रहा था। इसके बावजूद परिचालन विभाग ने 28 की रात 3:36 बजे से 29 दिसंबर की सुबह 5:18 बजे के बीच हरी झंडी दिखाकर पांच मालगाड़ियों को रवाना किया। यह लापरवाही सियालदह-अजमेर एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त वजह बन गई। इस हादसे में ट्रेन के 15 डिब्बे पटरी से उतरे थे और 68 यात्री गंभीर रूप से घायल हुए थे। जीआरपी इंस्पेक्टर सतीश गौतम ने बताया कि रेलवे ने जो कार्रवाई की है, उससे उन्हें मतलब नहीं है। वह लापरवाही के मामले में दर्ज मुकदमे की जांच कर रहे हैं। इसी संबंध में रेलवे कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है।