कानपुर। छात्र के अपहरण के 18 साल पुराने मुकदमे में अपर जिला जज 21 अनुपम सिंह ने दो सगे भाइयों समेत पांच को दस-दस साल कैद और दस-दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है जबकि सबूतों के अभाव में तीन को दोषमुक्त करार दिया है। दो आरोपियों की मौत हो चुकी है जबकि एक फरार चल रहा है।
दादानगर स्थित एक फैक्टरी में जगदीश बेनीवाल प्रबंधक थे। उनका 16 वर्षीय पुत्र अनुज बेनीवाल 17 मार्च 2008 की सुबह पांडुनगर स्थित स्कूल में परीक्षा देने गया था। दोपहर तक नहीं लौटने पर पिता ने काकादेव थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। 19 अप्रैल को कानपुुर देहात के गुगाैली घाट राम सलारपुर के पास से पुलिस मुठभेड़ के बाद अनुज को ढूंढ लिया गया था। विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि पुलिस ने 11 अभियुक्तों कपिल तिवारी, राजू तिवारी, रिंकू तिवारी, पिंटू तिवारी, सोनू पाल, लल्ला सविता उर्फ श्याम जी, मुन्ना सिंह तोमर, विकास मिश्रा, संतोष अवस्थी, अमित दीक्षित उर्फ अंशू व संदीप उर्फ संटी उर्फ बब्लू के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट भेजी थी। मुकदमे के दो आरोपी लल्ला सविता और विकास मिश्रा की मौत हो गई जबकि मुन्ना सिंह तोमर फरार चल रहा है। औरैया निवासी कपिल तिवारी, उसके भाई राजू तिवारी, रिंकू तिवारी व उसके भाई पिंटू तिवारी, सोनू पाल, कानपुर देहात के सिकंदरा निवासी संतोष अवस्थी, रसूलाबाद निवासी अमित दीक्षित उर्फ अंशू, जालौन निवासी संदीप उर्फ संटी उर्फ बब्लू के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई चली। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने कपिल तिवारी, राजू तिवारी, रिंकू तिवारी, सोनू पाल व अमित दीक्षित को दोषी मानते हुए सजा सुनाई जबकि सबूतों के अभाव में पिंटू तिवारी, संतोष अवस्थी और संदीप उर्फ संटी को दोषमुक्त करार दिया गया।
फैक्टरी से निकाला तो रची अपहरण की साजिश
जगदीश की फैक्टरी में रसूलाबाद निवासी अमित दीक्षित उर्फ अंशू काम करता था और उसका घर भी आना-जाना था लेकिन बाद में पता चला कि वह नशे का आदी है तो उसे फैक्टरी से निकाल दिया था। नौ मार्च को अमित जगदीश के घर आया था और बेटे से परीक्षा की तारीखें व अन्य जानकारी हासिल कर रहा था। अगले दिन अमित को दो और लड़कों के साथ घर के सामने पार्क में बैठा देखा गया था। अमित ने उन लड़कों से भी अनुज की पहचान कराई थी। अनुज की जानकारी न मिलने पर जब अमित को फोन किया तो उसका फोन बंद हो गया था।