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ढह गया खुशियों का ताजमहल: गोद भरी पर उजड़ गई मांग, मुमताज की मौत का मंजर दे गया आंसुओं में खौफनाक सन्नाटा

Mon, 17 Aug 2026 08:27 PM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कानपुर

सार

Kanpur News: भीतरगांव ब्लॉक के देवसढ़ गांव निवासी मुमताज और शाहजहां ने नई जिंदगी की उम्मीद में गांव से दूर खेतों के बीच नया मकान बनाया था। छह साल के लंबे इंतजार और दो बार बच्चों को खोने के दर्द के बाद पांच महीने पहले इसी घर में बेटी की किलकारी गूंजी तो परिवार ने धूमधाम से खुशियां मनाईं। लेकिन कुछ ही महीनों में यह खुशी मातम में बदल गई।
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मुमताज हत्याकांड - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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छह साल का लंबा इंतजार, दो बार मासूम बच्चों को खोने का असहनीय दर्द और समाज के ताने... भीतरगांव ब्लॉक के देवसढ़ निवासी मुमताज और उनकी पत्नी शाहजहां के जीवन में दुखों का सिलसिला थमा नहीं था। पुरानी देहरी को अपशगुन बताए जाने पर मुमताज ने गांव से एक किलोमीटर दूर खेतों के बीच अपने सपनों का नया आशियाना बनाया था। उन्हें उम्मीद थी कि यह नया घर उनकी तकदीर बदल देगा।

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5 महीने पहले जब इस नए आशियाने में नन्ही परी की किलकारी गूंजी, तो मुमताज की खुशी का ठिकाना न रहा। उन्होंने धूमधाम से जश्न मनाया, मानो जिंदगी ने उन्हें सब कुछ दे दिया हो। लेकिन नियति को यह 'खुशियों का ताजमहल' मंजूर न था। महज 5 महीने में ही खुशियां मातम में तब्दील हो गईं। हैवानों ने शाहजहां की गोद तो भर दी, लेकिन उसकी मांग का सिंदूर सदा के लिए उजाड़ दिया।

मृतक मुमताज - फोटो : amar ujala

खेतों में बना सपनों का नया आशियाना

मुमताज और शाहजहां की शादी को छह साल बीत चुके थे। इस दौरान दंपति ने दुखों का एक लंबा दौर देखा। शाहजहां ने दो बार बच्चों को जन्म दिया, लेकिन दोनों ही बार मासूम बच्चे जीवित नहीं बच सके। बच्चों की मौत के बाद गांव और समाज के लोगों ने तरह-तरह की बातें बनानी शुरू कर दीं। किसी ने उनकी पुरानी देहरी को अपशगुन बताया, तो किसी ने कहा कि इस घर में कभी बच्चों की किलकारी नहीं गूंज सकती।

समाज के इन तानों से आहत होकर मुमताज ने एक बड़ा फैसला लिया। उसने गांव की आबादी से करीब एक किलोमीटर दूर, खेतों के बीचों-बीच एक नई जमीन पर अपना घर बनाना शुरू किया। मुमताज ने दिन-रात मेहनत करके इस घर की एक-एक ईंट जोड़ी थी। उसे लगा था कि पुरानी देहरी छूटने के बाद उनकी किस्मत के बंद दरवाजे भी खुल जाएंगे।

हत्यारा शोएब उर्फ़ रानू - फोटो : amar ujala
उसकी यह मुराद पूरी भी हुई। आज से ठीक 5 महीने पहले इस नए मकान में एक नन्ही परी की किलकारी गूंजी। बेटी के जन्म पर मुमताज ने पूरे गांव में मिठाइयां बांटी थीं। उसे लगा था कि जिंदगी ने उसके सारे जख्मों पर मरहम लगा दिया है।

वह काली रात और हैवानों का खूनी खेल

नियति को मुमताज की यह खुशी रास नहीं आई। बीते 7 और 8 अगस्त की दरम्यानी रात, जब पूरा देवसढ़ गांव गहरी नींद के आगोश में था और खेतों के बीच बने मुमताज के घर के चारो ओर घुप अंधेरा और सन्नाटा पसरा था, तभी मौत दबे पांव उनके घर में दाखिल हुई। रात के पिछले पहर दो अज्ञात और बेखौफ बदमाश लूटपाट के इरादे से मुमताज के घर में घुस गए।

बदमाशों की आहट सुनकर मुमताज की नींद खुल गई। जब उसने देखा कि बदमाश उसके सपनों के आशियाने में लूटपाट कर रहे हैं, तो वह निहत्थे ही उनसे भिड़ गया। मुमताज ने पूरी ताकत से बदमाशों का विरोध किया। खुद को घिरता देख उन हैवानों ने अपने पास छिपाई कुल्हाड़ी निकाल ली और मुमताज पर ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए। कुल्हाड़ी के धारदार प्रहार से मुमताज लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ा।

सीने से मासूम को चिपकाए रही शाहजहां, चेहरे पर पड़े अनगिनत घूंसे

पति की चीख सुनकर पत्नी शाहजहां की नींद टूटी। अपने सुहाग को खून से लथपथ तड़पता देख वह बदमाशों से जूझने के लिए दौड़ पड़ी। लेकिन उन दरिंदों के सिर पर खून सवार था। उन्होंने शाहजहां पर भी कुल्हाड़ी और चाकू से जानलेवा हमला कर दिया। बदमाशों ने शाहजहां के चेहरे और सिर पर इतने घूंसे मारे कि वह पूरी तरह से बेसुध होने लगी।

चेहरे की हड्डियां दरकने लगीं, लेकिन एक मां की ममता उस खौफनाक रात में भी हार नहीं मानी। शाहजहां ने अपनी 5 महीने की मासूम बच्ची को अपने सीने से कसकर चिपका लिया, ताकि बदमाशों का कोई भी वार उसकी फूल सी बच्ची तक न पहुंच सके। वह अपनी आंखों के सामने अपने पति को तड़प-तड़प कर दम तोड़ते हुए देखती रही, लेकिन चाहकर भी कुछ नहीं कर सकी। पूरा घर खून से लाल हो चुका था और मुमताज की सांसें हमेशा के लिए थम चुकी थीं।

240 घंटे बाद भी नहीं टूटा खौफ का तिलिस्म

इस रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात को आज 240 घंटे (10 दिन) से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है। पुलिस की जांच चल रही है, लेकिन शाहजहां के दिलो-दिमाग पर उस रात का खौफनाक मंजर इस कदर हावी है कि उसकी हालत देखकर किसी का भी कलेजा फट जाए। लगातार रोने के कारण उसकी आंखों के आंसू अब पूरी तरह सूख चुके हैं। वह बस एकटक शून्य में निहारती रहती है।

चेहरे और जबड़े पर बदमाशों द्वारा मारे गए ताबड़तोड़ घूंसों की वजह से शाहजहां को गहरी अंदरूनी चोटें आई हैं। उसकी हालत यह है कि वह अन्न का एक दाना भी चबाने या निगलने में असमर्थ है। पिछले 10 दिनों से उसे केवल नली के सहारे या चम्मच से तरल पदार्थ (जूस और पानी) ही दिया जा रहा है।

मासूम को पता नहीं, छिन गया पिता का साया

शाहजहां के जेठ भूरा खान रुंधे गले से बताते हैं कि शाहजहां का लगातार डॉक्टरों से इलाज कराया जा रहा है, लेकिन गहरा सदमा लगने के कारण वह सो नहीं पा रही है। रात होते ही वह डर के मारे कांपने लगती है। उसकी सास अबदा बेगम, जेठ-जेठानी और मायके से आई उसकी बूढ़ी मां परवीन बानो 24 घंटे उसके सिरहाने बैठकर उसकी देखभाल कर रही हैं।

सबसे ज्यादा रुला देने वाला मंजर उस 5 महीने की मासूम बच्ची का है। वह अपनी मां की गोद में लेटकर अपनी तोतली मुस्कान बिखेरती रहती है। उस नन्ही जान को इस बात का जरा भी इल्म नहीं है कि जिस पिता ने उसे पहली बार गोद में लेकर अपनी सारी दुनिया उसके नाम कर दी थी, वह अब कभी लौटकर नहीं आएगा।

इस जघन्य हत्याकांड ने पूरे भीतरगांव और देवसढ़ इलाके को अंदर तक झकझोर कर रख दिया है। खेतों में बना वह नया मकान, जिसे मुमताज ने अपने 'खुशियों का ताजमहल' समझकर बनाया था, आज एक खौफनाक खंडहर में तब्दील हो चुका है।
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ग्रामीण अब दहशत में हैं और हर किसी की जुबान पर बस एक ही सवाल है कि आखिर इस बेगुनाह परिवार को उजाड़ने वाले वो हैवान पुलिस की गिरफ्त में कब आएंगे? पुलिस प्रशासन मामले के खुलासे के लिए लगातार दबिश दे रहा है, लेकिन शाहजहां की उजड़ी हुई मांग और उस मासूम के सिर से उठा पिता का साया कोई भी कानून वापस नहीं लौटा सकता।
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