कानपुर देहात। सरवनखेड़ा ब्लॉक के करसा गो-आश्रय स्थल में चारे की व्यवस्था ठीक न होने से गोवंश भूखे हैं। पांच गाय मरणासन्न अवस्था में पहुंच गई हैं। वह खड़ी तक नहीं हो पा रही है। अन्य गायों की हालत बिगड़ रही है। एक सप्ताह पहलेे यहां एक बछड़े की मौत हो गई थी। यही हालत बिसलसरायां व रायपुर आश्रय स्थलों की है।
गोवंश आश्रय स्थलों में चारे के नाम पर सिर्फ सूखा भूसा खिलाया जा रहा है। इससे गायें भरपेट चारा नहीं खा रही हैं। वह कमजोर होती जा रही हैं। करसा आश्रय स्थल में तो पांच गाय खड़े होने की स्थिति में नहीं है। इसी तरह से बिलसरायां, रायपुर, फत्तेपुर रोशनाई आश्रय स्थलों में गोवंश की हालत ठीक नही है। वहां भी चारे के नाम पर सिर्फ सूखा भूसा ही दिया जा रहा है।
पशु चिकित्सकों की माने तो पशु को स्वस्थ रखने के लिए कम से कम 7 से 8 किलोग्राम भूसा, दो से तीन किलोग्राम हरा चारा, एक किलोग्राम खली, इतना ही चोकर दिया जाना चाहिए। शासन की ओर से गोवंशों के चारे के लिए सिर्फ तीस रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिए जा रहे हैं। ऐसे में केवल पांच किलो भूसा मिलता है।
चोकर व हरा चारा खरीदने के लिए राशि नहीं है। ग्रामीणों की माने तो आश्रय स्थल में एक या दो बोरे चोकर सिर्फ दिखाने के लिए रखा रहता है। वहां पहुंचने वाले अधिकारियों को बताया जाता है दो बोरे रखे हैं और मंगाया जा रहा है।
गोवंश आश्रय स्थलों में भूसा बैंक बनाया जा रहा है। भूसे की कोई कमी नहीं है। चोकर की व्यवस्था करने के लिए पंचायत सचिवों को निर्देश दिया है। हरा चारा इस समय मिल नहीं रहा है। इससे समस्या आ रही है। करसा आश्रय स्थल का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्था सुधारी जाएगी।
- अशोक कुमार, बीडीओ सरवनखेड़ा।
एसडीएम ने आश्रय स्थलों का किया निरीक्षण
रसूलाबाद। क्षेत्र के असालतगंज, गंभीरा, भैंसायां गो-आश्रय स्थल का शनिवार को एसडीएम अंजू वर्मा ने औचक निरीक्षण किया। उन्हें असालतगंज गौशाला में एक गाय बीमार मिली जिसके उपचार के लिए उन्होंने पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए। एसडीएम ने बताया कि गर्मी के मौसम में गोआश्रय स्थलों की व्यवस्था देखने के लिए निरीक्षण किया गया है। असालतगंज में एक गाय बीमार होने पर डॉ. रूचि सिंह को उपचार करने के निर्देश दिए गए हैं। अन्य आश्रय स्थलों की स्थिति सामान्य है। (संवाद)