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शहर के पांच लॉ कॉलेजों का रिजल्ट जीरो

Sat, 07 May 2016 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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जिले में शत-प्रतिशत रहा आईसीएसई का रिजल्ट
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कानपुर। एलएलबी (तीन वर्षीय) की सेमेस्टर परीक्षा में फेल और पास स्टूडेंटों का ब्योरा शुक्रवार को कानपुर यूनिवर्सिटी ने जारी कर दिया। शहर के नौ अनुदानित और निजी लॉ कॉलेजों के एलएलबी फर्स्ट सेमेस्टर के 1910 में से 20 स्टूडेंट ही पास हो सके। शहर के पांच लॉ कॉलेजों का रिजल्ट शून्य है।
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एलएलबी पहले, तीसरे और पांचवें सेमेस्टर का रिजल्ट मई के पहले सप्ताह में घोषित हुआ लेकिन इसका कंपाइल डाटा शुक्रवार को रिलीज किया गया। इसके मुताबिक एलएलबी तीसरे और पांचवें सेमेस्टर में 40 फीसदी स्टूडेंट ही पास हो सके। 60 फीसदी स्टूडेंटों    का रिजल्ट क्लीयर नहीं हुआ। एलएलबी फर्स्ट सेमेस्टर का रिजल्ट बेहद खराब    है। यूनिवर्सिटी से संबद्ध 47 लॉ कॉलेजों के करीब 96 फीसदी स्टूडेंट पास नहीं हो सके। इन कॉलेजों का दायरा यूपी के 14 जिलों में फैला है। 20 कॉलेज ऐसे हैं, जिनके रिजल्ट शून्य में हैं।
दो कॉलेजों का रिजल्ट रोका
गया प्रसाद द्विवेदी विधि महाविद्यालय शिवराजपुर और शहीद भगत सिंह लॉ कॉलेज के एक दिन की सभी परीक्षाएं निरस्त की गई हैं। इस कॉलेज का रिजल्ट अभी तक नहीं आया है। जल्द ही निरस्त परीक्षा होगी, फिर रिजल्ट घोषित किए जाएंगे।  
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48 फीसदी मार्क्स लाना जरूरी
जो स्टूडेंट सभी पेपर में पास हैं लेकिन ओवर आल 48 फीसदी मार्क्स नहीं बन रहे हैं तो वह फेल माने जाएंगे। इसका प्रावधान यूनिवर्सिटी अध्यादेश में पहले से है।
ज्यादातर का रिजल्ट गोल
यूनिवर्सिटी से संबद्ध कानपुर देहात, इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज, फतेहपुर, कौशांबी, इलाहाबाद, रायबरेली, उन्नाव, सीतापुर, हरदोई और लखीमपुर खीरी के लॉ कॉलेजों के रिजल्ट भी बेहद खराब हैं। एलएलबी फर्स्ट सेमेस्टर के ज्यादातर स्टूडेंट फेल हैं।
बदलेगा अध्यादेश
एलएलबी में फेल स्टूडेंटों को अगले सेमेस्टर में भेजने और उनकी परीक्षा कराके रिजल्ट देने का अध्यादेश बदला जाएगा। इस पर यूनिवर्सिटी प्रशासन की सहमति बन गई है। जल्द ही डीन और बोर्ड ऑफ स्ट्डीज की मीटिंग बुलाई जाएगी। हालांकि इस बदलाव का लाभ सत्र 2015-16 के स्टूडेेंटों को नहीं मिलेगा। बताते चलें कि बीएनडी कॉलेज ने आर्डिनेंस के प्रावधान और यूनिवर्सिटी के कामकाज को एक दूसरे का विरोधी बताया था। विभागाध्यक्ष डॉ. वीएस त्रिपाठी ने कहा था कि एलएलबी सेकेंड सेमेस्टर में प्रैक्टिकल 100 मार्क्स के होते हैं लेकिन यूनिवर्सिटी 20 मार्क्स का कराती है। 80 मार्क्स के थ्योरी पेपर कराए जाते हैं। इसी आधार पर अध्यादेश बदला जा रहा है।
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