कानपुर। गंगा किनारे बसे जाजमऊ समेत शहर के पांच इलाके जहां पानी में जहरीले तत्व अधिक पाए जाते हैं वहां के लोगों के लिए अच्छी खबर है। अब उन्हें पीने के लिए शुद्ध और सुरक्षित पानी मिलेगा। सेंसर युक्त फिल्टर पानी के जहरीले तत्वों को पहचान कर उन्हें छान देगा जबकि पानी में मौजूद आवश्यक मिनरल्स और अच्छे तत्व बरकरार रहेंगे। यह जानकारी आईआईटी मुंबई की मैटेरियल साइंसेज की प्रोफेसर शोभा शुक्ला ने मंगलवार को दी। वह सीएसजेएमयू के साथ मिलकर शहर में प्रोजेक्ट शुरू कर रही हैं।
सीएसजेएमयू के सीनेट हॉल में एडवांस्ड रिसर्च एंड एआई इनेबल्ड इनोवेशन इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी फॉर प्रजेंट चैलेंजेज एंड फ्यूचर अपॉर्च्युनिटीज विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में प्रोफेसर शुक्ला ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लोग आरओ तकनीक का उपयोग करते हैं जो बुरे तत्वों के साथ शरीर के लिए जरूरी तत्व भी निकाल देता है। उन्होंने प्रदूषित पानी को लेकर आईआईटी कानपुर की सर्वे रिपोर्ट ली है। उसी आधार पर शुरुआत जाजमऊ, गंगा बैराज समेत पांच जगहों से की जाएगी।
उन्होंने बताया कि पानी को फिल्टर से छानने के अलावा इंटरफेशियल हीटिंग सिस्टम का भी उपयोग किया जाएगा। इसमें नैनो पार्टिकल्स को गर्म कर पानी वाष्पीकृत किया जाएगा और फिर उसे इकट्ठा कर इस्तेमाल किया जाएगा जिससे पानी डिस्टिल्ड वाटर की तरह शुद्ध होगा। यह प्रणाली सौर ऊर्जा से चलेगी और बिजली की आवश्यकता नहीं होगी।
प्रोफेसर शुक्ला ने बताया कि पानी को छानने के लिए ग्राफीन, लेड, मर्करी और आर्सेनिक फिल्टर तैयार किए गए हैं। पानी के शुद्धीकरण के लिए कार्बन का इस्तेमाल किया जाता है। ये फिल्टर औद्योगिक अपशिष्ट युक्त पानी को भी साफ करने में सक्षम हैं।