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ये है देश की पहली राष्ट्रीय अविष्कार लैब, अब छोटे जिलों से तैयार होंगे बड़े वैज्ञानिक

Sun, 19 Mar 2017 12:45 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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अविष्कार लैब की शुरूआत करते डीएम के बालाजी
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अब छोटे जिलों से भी बड़े वैज्ञानिक तैयार होकर देश का नाम रोशन कर सकेंगे। राष्ट्रीय अविष्कार अभियान के अंतर्गत देश की पहली राष्ट्रीय अविष्कार लैब यूपी के औरैया जिले में खुल चुकी है। जीजीआईसी दिबियापुर में शनिवार को गेल पाता के अधिशाषी अधिकारी एवं एचआरडी मंत्रालय के सीनियर कंसलटेंट की मौजूदगी में जिलाधिकारी के.बालाजी ने लैब का उद्घाटन किया। जिलाधिकारी औरैया के बालाजी ने कहा कि इस लैब के माध्यम से प्रशिक्षक गणित विज्ञान की नई तकनीक सीखेंगे। बाद में नई तकनीक सीखकरबच्चे भी वैज्ञानिक बनकर देश सेवा कर सकेंगे।  बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा से जुड़े लोगों को इसके लिए प्रयास भी करने होंगे। मानव संसाधन मंत्रालय के सीनियर कंसलटेंट अवनीश त्रिपाठी ने बताया कि 9 जुलाई 2015 को तत्कालीन राष्ट्रपति डा.एपीजे अब्दुल कलाम ने राष्ट्रीय अविष्कार अभियान की शुरूआत की थी। इस अभियान के तहत औरैया जिले में प्रोजेक्ट अवंत वित्तीय वर्ष 2015-16 में 30 सरकारी पूर्व माध्यमिक स्कूलों में शुरूआत हुई थी। आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्रों की संस्था यूनीसेड के माध्यम से बहुत कम बजट में स्मार्ट कक्षाओं की स्थापना की गई। इसके माध्यम से बच्चों में विज्ञान एवं गणित विषयों की प्रति रुचि बढ़ी। इस उपलब्धि की चर्चा राज्यसभा में तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने की थी। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता को देखते हुए वर्तमान वित्तीय वर्ष में 60 नए स्कूलों में स्मार्ट कक्षाओं की स्थापना हुई है। इन स्मार्ट कक्षाओं में बच्चों को पढ़ाने के लिए अभी तक कानपुर जाना पड़ता था। लैब की शुरूआत होने से अब यहीं पर प्रशिक्षण हो सकेगा।  
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वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए नामचीन प्रोफेसरों से जुड़ पाएंगे 

लैब में उपकरण देखते गेल के कार्यकारी निदेशक एमबी गोहिल
देश की पहली राष्ट्रीय अविष्कार लैब में शिक्षक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए देश के धुरंधर एवं नामचीन प्रोफेसरों से जुड़ पाएंगे। अभी तक स्मार्ट क्लासेस में बच्चों को प्रशिक्षण देने के लिए प्रशिक्षकों को कानपुर जाना पड़ता था। कानपुर में आईआईटी के पास अन्वेषिका लैब में प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाता था। दिबियापुर में लैब बन जाने से यहां प्रोजेक्टर, साइंस एवं मैथ की कई किटें रखीं गईं हैं। फिलहाल यह जिले का नोडल प्रशिक्षण केंद्र बन गया है। अधिकारियों के अनुसार अच्छे बच्चों को लैब में प्रशिक्षित होने का मौका मिल सकेगा। सरकारी स्कूलों में संचालित स्मार्ट क्लासेस में बच्चे इंगलिश मीडियम स्कूल छोड़कर गणित एवं साइंस के गुर सीख सकेंगे।  
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