रूरा (कानपुर देहात)। कस्बे के रेलवे स्टेशन पर तीन साल से बंद पड़े अधिकारी विश्राम गृह के परिसर में शुक्रवार को अचानक आग लग गई। यहां रखे सिग्नल केबल, लकड़ी के स्लीपरों के साथ पेड़ और घास फूस जलने लगे। तेज हवा से आग बढ़ती देख रेलवे के अधिकारियों ने दमकल टीम को सूचना दी। मौके पर दो फायर टेंडर लेकर पहुंचे कर्मचारियों ने दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग से लाखों रुपये का सामान जलने का अनुमान है। इस बारे में रेलवे के अफसर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुए।
कस्बे के रेलवे स्टेशन परिसर में बना रेलवे अधिकारी विश्राम गृह करीब तीन साल से बंद है। इसके चलते परिसर को डंपिंग यार्ड के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। परिसर में सिग्नल केबल, लड़की के स्लीपर, प्रचार सामग्री के अलावा अन्य अन्य सामान पड़ा है। शुक्रवार को यहां अचानक आग केबल में आग लग गई। देखते ही देखते लपटों ने पास में पड़े लकड़ी के स्लीपरों, प्रचार सामग्री और अन्य सामान को चपेट ले लिया। हवा चलने से आग की लपटें पेड़ों और घासफूस तक पहुंच गई। इससे आग ने विकराल रूप ले लिया। लपटें और धुआं देख स्टेशन पर मौजूद अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे और फौरन दमकल विभाग को खबर दी गई।
करीब आधा घंटा में अकबरपुर फायर स्टेशन से दमकल कर्मी दो फायर टेंडर लेकर मौके पर पहुंचे और आग पर पानी की बौछार शुरू की। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग बुझ सकी। स्टेशन अधीक्षक अशोक कुमार ने बताया कि शुक्रवार को सुबह करीब 11 बजे रेलवे अधिकारी विश्राम गृह परिसर में रखे केबल आदि सामान में आग लगी थी। इस पर रूरा थाना पुलिस, आरपीएफ, दमकल विभाग व टेक्निकल स्टाफ को सूचना दी गई। रेलवे कर्मियों ने आसपास के लोगों की मदद से आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। दमकल कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर दोपहर दो बजे करीब दो बजे आग पर काबू पाया।
वर्जन
रेलवे अधिकारी विश्राम गृह लगभग तीन वर्ष से बंद है। यहां तैनात माली व चौकीदार के सेवानिवृत्ति होने के बाद से कोई कर्मचारी नहीं रहता था। परिसर में पड़े सामान पर किसी के जलती हुई बीड़ी या सिगरेट फेंकने से आग लगने की आशंका है। आग से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। - अशोक कुमार, स्टेशन अधीक्षक, रूरा
मार्ग पर गिरीं जलते पेड़ों की डालें, आवागमन रुका
परिसर में लगे पेड़ों के जलने से उनकी डालें टूटकर रेलवे अधिकारी विश्राम गृह के पीछे स्टेशन मार्ग पर गिरी। इससे लोगों में अफरातफरी मच गई। मार्ग पर लोगों का आवागमन थम गया। इसी बीच दमकल की गाड़ियां पहुंचीं, तो पुलिस ने रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया। आग बुझने पर करीब ढाई घंटे बाद इस मार्ग पर आवागमन शुरू हो सका।
आग बुझाने के बजाय वीडियो बनाते रहे काफी लोग
आग की लपटें देख आसपास के लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। इस दौरान तमाम लोग आग बुझाने का प्रयास करने की बजाय मोबाइल से वीडियो बनाने में लगे रहे। कई तमाशबीन बने रहे। आग पर काबू पाने के लिए रेलवे की पानी की टंकी की मोटर चलाई गई, लेकिन विश्रमगृह की वाटर सप्लाई बंद होने के चलते वहां तक पानी नहीं पहुंच सका।