केडीए ने रविवार को रॉयल कॉटेज होटल के संचालक गुलशन कुमार धूपर के खिलाफ आईपीसी की धारा - 188 (सरकारी आदेश का उल्लंघन) के तहत एफआईआर करवा ही दी है। पुलिस ने भी इसमें देर नहीं की।
वहीं दूसरी तरफ होटल की दूसरी मंजिल सील करने तिलक नगर पहुंची केडीए टीम को होटल संचालक ने हल्के में लेते हुए चलता कर दिया।
अब केडीए के अफसर कह रहे हैं कि सोमवार को पुलिस बल लेकर जाएंगे और होटल के दूसरे माले पर सील जरूर लगाएंगे। इस कार्रवाई से केडीए और पुलिस की पोल भी खुल गई।
गौरतलब है कि ‘पुलिस केडीए की डील, आड़े नहीं आई सील’ खबर ‘अमर उजाला’ मेें छपने के बाद रविवार को छुट्टी के दिन केडीए आफिस खोला गया।
रिकॉर्ड दिखवाए गए और एफआईआर के लिए तैयार अर्जी निकाली गई। सुपरवाइजर नारायण दास और वी शर्मा को रिपोर्ट लिखाने के लिए कोहना थाने भेजा गया, वहां उन्होंने तहरीर दी।
कोहना थानाध्यक्ष नीरज यादव ने बताया कि केडीए के प्रवर्तन विभाग के अधिशाषी अभियंता एमके मिश्रा की तरफ से रॉयल कॉटेज के संचालक गुलशन कुमार धूपर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
सील तोड़कर निर्माण कराने और सरकारी आदेश की अवहेलना करने के इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। मामले की विवेचना की जा रही है। उधर, इस होटल को सील करने पहुंचे केडीए प्रवर्तन दस्ते को वहां मौजूद लोगों ने टरका दिया।
रॉयल कॉटेज के संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई है। इस होटल में अवैध निर्माण सील करने के लिए अवर अभियंता बीपी सिंह और आरबी सिंह को भेजा गया था, पर वहां उन्हें सीलिंग नहीं करने दी गई।
सोमवार को मैडम (केडीए वीसी जयश्री भोज) और सचिव से बात करने के बाद पुलिस फोर्स लेकर मौके पर जाएंगे। वहां तीसरी बार सीलिंग की जाएगी। इसके लिए कोहना थानाध्यक्ष से भी बात हो गई है।
एमके मिश्रा, अधिशाषी अभियंता, जोन-1 प्रवर्तन विभाग
ध्वस्तीकरण तक संभव
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुन: सीलिंग की जा सकती है। इसके बाद यदि अशमनीय भाग शमन शुल्क लेकर शमनीय करने योग्य होगा तो केडीए उसका शमन करेगा, वरना उसे ध्वस्त करना पड़ेगा।
वैसे भी रॉयल कॉटेज का नक्शा आवासीय में स्वीकृत हुआ था, पर इसका कामर्शियल उपयोग शुरू कर दिया गया है। इसके बेसमेंट में भी पार्किंग के बजाय जिम और केमिकल गोदाम है।
अशमनीय भाग न तोड़ने पर जमानत राशि जब्त
बीती 29 अक्तूबर को हुई केडीए बोर्ड की 112 वीं बैठक में अशमनीय भाग को हटाने हेतु शपथपत्र के साथ प्रतिभूति जमा करने के संबंध में आइटम संख्या - 112/12 दिनांक 14-10-2014 को अनुमोदित किया गया।
बोर्ड ने निर्देशित किया कि यदि 30 दिन के अंदर संबंधित व्यक्ति द्वारा अशमनीय भाग न हटाया जाए तो उसके द्वारा प्राधिकरण में प्रतिभूति (जमानत राशि) के रूप में जमा की गई एफडीआर का प्राधिकरण अपने पक्ष में भुगतान करा ले।