आईआईटी कानपुर में दलित असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुब्रमण्यम सडरेला के उत्पीड़न मामले में आरोपी बनाए गए चारों सीनियर प्रोफेसर को निलंबित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए। यह निर्देश नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल कास्ट (एनसीएससी) की ओर से शनिवार को आईआईटी निदेशक प्रो. मणिंद्र अग्रवाल को दिए गए।
निदेशक प्रो. मणिंद्र अग्रवाल और एयरोस्पेस विभाग के अध्यक्ष प्रो. एके घोष दस अप्रैल को आयोग के समक्ष पेश हुए थे। तब आयोग ने जांच प्रक्रिया और कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जाहिर की थी। आयोग ने कहा था कि आईआईटी प्रशासन को अब उसके निर्देशों का पालन करना होगा। इसी क्रम में आयोग ने निदेशक को चारों आरोपी प्रोफेसरों को निलंबित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही एक मई तक इसकी रिपोर्ट तलब की है। प्रो. मणिंद्र के मुताबिक, आयोग के निर्देश पर सोमवार से कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
दो अन्य प्रोफेसर पर गिरी गाज
दलित प्रोफेसर के उत्पीड़न में संस्थान के दो अन्य प्रोफेसरों पर भी गाज गिर गई है। इसमें एक प्रोफेसर आईआईटी कानपुर के एससी-एसटी कमेटी के चेयरमैन हैं। उन्होंने जांच के बाद आयोग से कहा था कि मामला संस्थान के अंदर की सियासत से प्रेरित है। इस पर आयोग ने उन्हें भी कमेटी के चेयरमैन पद से हटाने को कहा है। बोर्ड ऑफ गवर्नेंस (बीओजी) की बैठक में मामले पर चर्चा की मांग करने वाले सीनेट के नामित सदस्य प्रो. देबोपम दास को भी बीओजी से हटाने की सिफारिश मानव संसाधन विकास मंत्रालय से की है। प्रो. दास भी एयरोस्पेस डिपार्टमेंट से हैं।