कटरी के जंगलों में तीन महीने से शातिर ‘कटरीना’ (बाघिन) की तलाश में खाक छान रहीं वन विभाग की टीम के हौंसले धीरे-धीरे पस्त होने लगे हैं। ‘कटरीना’ को पकड़ने के लिए हर जतन करने के बाद अब अधिकारियों को कुछ सूझ ही नहीं रहा है। रही सही कसर इस भीषण ठंड और कोहरे ने पूरी कर दी है। वन विभाग की टीम भी इसके लिए मौसम को जिम्मेदार ठहरा रही है। वन विभाग और लखनऊ जू के डॉक्टर उत्कर्ष शुक्ला ने बताया कि घने जंगलों में कोहरे की वजह से एक मीटर देखना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में कांबिंग करने में काफी परेशानी आ रही है। हालांकि वन विभाग को दो दिन पहले शुक्लागंज की तरफ ‘कटरीना’ के पैरों के निशान मिले हैं।
11 अक्तूबर से बाघिन के पीछे लगी वन विभाग की टीम अभी तक केवल फुट प्रिंट्स और किलिंग के आधार पर ही बाघिन को ट्रेस कर रही है। एक बार तो बाघिन केज के भीतर भी घुसी लेकिन केज का मैक्निजम ऑन नहीं होने की वजह से वह फिर वहां से निकल गई। इसके बाद कई बार उसके लिए वहां चारा रखा गया लेकिन वह दोबारा उसमें नहीं दाखिल हुई। फुट मार्क के आधार पर अधिकारियों का कहना है कि शुक्लागंज बालू घाट से लेकर बैराज की पुलिस चौकी तक बाघिन ने अपना ठिकाना बना रखा है। लेकिन बीते दो दिनों से न तो उसके पैरों के निशान मिले हैं और न ही उसके शिकार करने की खबर आई है। मौसम ठीक हो तो कांबिंग में भी तेजी आएगी।