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‘आंकड़ेबाजी नहीं, गंगा का प्रदूषण दूर करो’

Wed, 03 Feb 2016 01:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
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केंद्रीय इस्टीमेट कमेटी के चेयरमैन डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि गंगा में प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है, यह बहुत ही गंभीर बात है। प्रदूषण नियंत्रण के काम में लगी एजेंसियां सिर्फ आंकड़ेबाजी में जुटी हैं।
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न तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अपनी भूमिका अच्छी तरह निभा रहा है, न ही नगर निगम। वह मंगलवार को गंगा पुनरुद्धार (गंगा रिजूविनेशन) विषय पर आयोजित बैठक में बोल रहे थे।

लैंडमार्क में आयोजित बैठक में डॉ. जोशी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों पर जमकर गुस्सा उतारा। उन्होंने कहा कि बोर्ड के अधिकारियों को प्रदूषण के आंकड़ेबाजी से बाहर आकर हकीकत में चीजों को देखना चाहिए। गंगा का जल हाथ में लेकर भी बताया जा सकता है कि वह कितना प्रदूषित है।
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उन्होंने कहा कि प्रदूषण कम ज्यादा का सवाल नहीं है। आखिर प्रदूषण क्यों है, हमें इस सवाल को सामने रखकर काम करने की जरूरत है। बैठक में बोर्ड के अधिकारियों ने कमेटी के सामने पिछले पांच साल के प्रदूषण के आंकड़े रखे। जिसमें यह दर्शाया गया कि प्रदूषण पहले से कम हो रहा है।

इस पर चेयरमैन डॉ. जोशी ने कहा कि मैं आंकड़ों पर विश्वास नहीं करता हूं, जब गंगा प्रदूषण मुक्त कर देना फिर रिपोर्ट दिखाना। इस बीच उन्होंने नगर आयुक्त को भी घेरे में लिया, बोले प्रदूषण फैलने से रोकने के लिए आखिर वे क्या कर रहे हैं।

होजरी इंडस्ट्री ने जताया विरोध
इस्टीमेट कमेटी द्वारा होजरी इंडस्ट्री को रेड जोन में रखे जाने पर इंडस्ट्री संचालकों ने विरोध जताया है। फेडरेशन आफ होजरी मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के ज्वाइंट सेक्रेटरी बलराम नरूला का कहना है कि जिस केमिकल को वे लोग प्रयोग में लाते हैं, वह सर्टिफाइड होता है। नरूला ने कहा कि सभी इंडस्ट्री ने अपने यहां ईटीपी (एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) लगा रखा है, जिससे हर रोज 25 किलोलीटर पानी ट्रीटमेंट होकर निकलता है।

चार सालों में सुधरी गंगा की स्थिति
संसदीय समिति की टीम में शामिल प्रमुख सचिव संजीव सरन ने कहा कि वर्ष 2011 में गंगा की स्थिति सबसे अधिक खराब थी। इसके बाद काफी सुधार हुआ है। गंगा के प्रदूषण का सबसे बढ़ा कारण इंडस्ट्री और सीवेज सिस्टम है, इस पर अंकुश लगाने का काम तेजी से काम चल रहा है। प्रदेश भर के 353 उद्योग बंद कराए गए, जिनमें 209 तो सिर्फ कानपुर के ही थे। जिसके चलते डालफिन की संख्या में भी बढ़ी।

विरोध जताने पहुंचे विधायक को रोका
जाजमऊ में एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) का निरीक्षण करने पहुंची इस्टीमेट कमेटी को काले झंडे दिखाने आए विधायक इरफान सोलंकी को डीएम ने रोक दिया। विधायक ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। विधायक इरफान सोलंकी कुछ चमड़े और छीलन कारोबारियों के साथ दोपहर 2 बजे जाजमऊ पहुंच गए।

सभी हाथों में काले झंडे लिए हुए थे। विधायक ने कहा कि गंगा के प्रदूषण के लिए हमेशा टेनरी उद्योग को दोषी माना जाता है। जबकि टेनरियों में सभी नियमों का पालन होता है। विरोध शांत कराने एडीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, एसीएम भानू प्रताप और सीओ कैंट सुनील घुले पहुंच गए।

थोड़ी देर बाद पहुंचे जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने सभी को समझाकर उनसे झंडे लिए। विधायक से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन लिया। थोड़ी देर बाद वहां पहुंची इस्टीमेट कमेटी के साथ विधायक इरफान और विधायक रघुनंदन भदौरिया चले गए।

25 एमएलडी का बनेगा एसटीपी
टेनरियों से निकलने वाले कचरे के निस्तारण के लिए जल्द ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की क्षमता बढ़ाई जाएगी। अभी टेनरी का दूषित पानी नौ एमएलडी (मिलियन लीटर डेली) ही शोधित हो रहा है। जल्द ही 25 एमएलडी होगा। इसका प्रस्ताव चार फरवरी को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को सौंपा जाएगा।

इस्टीमेट कमेटी के चेयरमैन डॉ. मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में सोमवार को तीस सांसदों और अधिकारियों की टीम ने जाजमऊ में एसटीपी का निरीक्षण किया। इस दौरान नगर विकास सचिव एसपी सिंह ने टीम के समक्ष एसटीपी की क्षमता में वृद्धि के बाबत ब्योरा प्रस्तुत किया।

टीम को बताया गया कि टेनरियों के लिए बनाए गए ट्रीटमेंट प्लांट को अपग्रेड किया जाएगा। एसटीपी के निरीक्षण से पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारियों के साथ हुई बैठक में चेयरमैन जोशी ने कमेटी की तरफ से सौंपी गई 2008 की रिपोर्ट पर भी चर्चा की। इसमें 25 एमएलडी ट्रीटमेंट प्लांट की बात कही गई थी।

इसी तरह टेनरियों में स्किल्ड लेबर के लिए ट्रेनिंग सेंटर शुरू करने की योजना भी बनाई गई थी। डॉ. जोशी ने बताया कि पिछली रिपोर्ट पर आगे भी काम किया जाएगा।
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