कानपुर। आईआईटी कानपुर में फाइटर जेट्स और दुश्मनों पर नजर रखने वाले टोही विमानों की ताकत बढ़ाने वाली तकनीकों पर मंथन हुआ। यह कार्यक्रम इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से डीआरडीओ-उद्योग-अकादमिक उत्कृष्टता केंद्र के तहत आयोजित किया गया। इसमें रक्षा, शिक्षा, शोध और उद्योग क्षेत्र से जुड़े करीब 70 विशेषज्ञ शामिल रहे। उन्होंने अगली पीढ़ी के स्टेल्थ एंटीना, रडार क्रॉस-सेक्शन, मेटासर्फेस, अवरक्त छलावरण, उन्नत विद्युत चुंबकीय सामग्री और रडार तकनीक पर चर्चा हुई की।
इन तकनीकों का उपयोग भविष्य में सुरक्षा और सर्विलांस के लिए किया जा सकेगा। डीआरडीओ की उत्कृष्ट वैज्ञानिक व डीएफटीएम की निदेशक डॉ. एन रंजना बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहीं। कार्यशाला का विषय ‘रणनीतिक हवाई अनुप्रयोगों के लिए अगली पीढ़ी के स्टेल्थ एंटीना और पुनर्संयोज्य विद्युतचुंबकीय संरचनाएं’ रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि नई तकनीकों के जरिए हवाई प्लेटफॉर्म की रडार पर दृश्यता कम करने के साथ संचार और निगरानी क्षमता को बेहतर बनाया जा सकता है। इससे दुश्मनों को चकमा दिया जा सकेगा।
यहां आरसीआई, एडीई, एलआरडीई, डीएलआरएल, डीएमएसआरडीई, आईटीआर, सीएफईईएस और सीईएमआईएलएसी समेत कई रक्षा संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए। आईआईटी, आईआईआईटी, विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और तकनीकी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी विचार साझा किए। तीन दिवसीय कार्यक्रम में 15 तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। पैनल चर्चा, उद्योग विशेषज्ञों के साथ संवाद के साथ तकनीकी प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें रेडियो फ्रीक्वेंसी, माइक्रोवेव, विद्युतचुंबकीय सिमुलेशन और मापन से जुड़ी तकनीकों की जानकारी दी गई।
आईआईटी कानपुर की माइक्रोवेव मापन, पीसीबी, ईएमआई-ईएमसी, एनएमवेव रिसर्च और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की स्ट्रक्चर्स प्रयोगशालाओं का भ्रमण किया। उन्हें संस्थान में चल रहे शोध कार्यों को करीब से देखने का अवसर मिला। आईआईटी के अनुसंधान एवं विकास अधिष्ठाता प्रो. जयंधरन राव समेत अन्य विशेषज्ञ मौजूद रहे।